नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, तीन सत्रों में हुआ व्यापक मंथन

दुर्ग :  हेमचंद्र यादव विश्वविद्यालय द्वारा “नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023” के क्रियान्वयन पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन सोमवार को रूंगटा डेंटल कॉलेज सभागार में किया गया। संगोष्ठी में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विशेषज्ञों ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी, अधिकारों और सशक्तिकरण पर गहन चर्चा की।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय परंपरा के अनुसार माँ सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. लवली शर्मा, विशिष्ट अतिथि किरणमयी नायक तथा कुलपति प्रो. संजय तिवारी उपस्थित रहे।
अपने उद्बोधन में किरणमयी नायक ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए इसे महिलाओं के लंबे संघर्ष का परिणाम बताया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में महिला मताधिकार आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय समाज में भी महिलाओं की भूमिका निर्णायक रही है।
डॉ. लवली शर्मा ने रानी लक्ष्मीबाई के साहस का उदाहरण देते हुए कहा कि महिलाओं की भागीदारी हर क्षेत्र में बढ़ रही है। उन्होंने भाषा और पदनामों में लैंगिक समानता की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. संजय तिवारी ने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने संविधान की प्रासंगिक धाराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं के योगदान को राष्ट्रीय विकास में उचित स्थान मिलना चाहिए।
संगोष्ठी का द्वितीय सत्र तकनीकी सत्र रहा, जिसमें पूर्व कुलपति अरुणा पल्टा, अधिवक्ता विभा सिंह एवं समाजसेवी डॉ. शताब्दी पाण्डेय ने विचार रखे। वक्ताओं ने महिला आरक्षण, संवैधानिक अधिकार, सामाजिक बाधाओं एवं पितृसत्तात्मक व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि समानता के साथ समता का अधिकार भी महिलाओं को मिलना चाहिए।
अंतिम वैलेडिक्टरी सत्र में डॉ. हंसा शुक्ला ने वैदिक काल से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन तक महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। डॉ. सुचित्रा शर्मा ने महिलाओं को आत्मविश्लेषण (SWOT) के माध्यम से अपनी क्षमता पहचानने का संदेश दिया। मुख्य अतिथि डॉ. रमा देवी पाणी ने समाज में व्याप्त रूढ़ियों पर चर्चा करते हुए महिला सशक्तिकरण के व्यावहारिक पहलुओं को साझा किया।
संगोष्ठी के दौरान विद्यार्थियों के बीच वाद-विवाद प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें 20 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रतियोगिता में कलश यादव प्रथम, मोनिका चंदनानी द्वितीय तथा पल्लवी ठाकुर एवं याग्नि देवांगन संयुक्त रूप से तृतीय स्थान पर रहे। विजेताओं को समापन समारोह में प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
तीन सत्रों—उद्घाटन, तकनीकी एवं वैलेडिक्टरी—में आयोजित इस संगोष्ठी के माध्यम से “नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023” के विभिन्न आयामों पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने, लैंगिक समानता को सुदृढ़ करने और जागरूकता फैलाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया।

रिपोर्टर : धर्मेंद्र गुप्ता

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