दुर्ग पूरी तरह बंद: केमिस्ट हड़ताल का व्यापक असर, 1200 मेडिकल स्टोर्स रहे बंद; कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
दुर्ग : देशव्यापी केमिस्ट बंद का असर बुधवार को दुर्ग जिले में पूरी तरह देखने को मिला। जिले भर में करीब 1200 मेडिकल स्टोर्स बंद रहे, जिससे दवा बाजार पूरी तरह ठप हो गया। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक दवा दुकानों के शटर डाउन रहे और आमजन को दवाइयों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। यह बंद ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के आह्वान पर आयोजित किया गया था, जिसका दुर्ग जिला दवा विक्रेता संघ ने व्यापक समर्थन किया।
बंद के दौरान दवा व्यापारियों ने अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई और जिले में पूर्ण रूप से व्यवसाय बंद रखा। प्रमुख बाजारों, चौक-चौराहों और मेडिकल हब माने जाने वाले क्षेत्रों में भी सन्नाटा पसरा रहा। इस दौरान आवश्यक सेवाओं को ध्यान में रखते हुए संघ द्वारा हर क्षेत्र में एक-एक मेडिकल स्टोर को चिन्हित किया गया था, ताकि आपात स्थिति में मरीजों को जरूरी दवाएं मिल सकें।
इसी कड़ी में दवा विक्रेताओं ने अपनी मांगों को शासन तक पहुंचाने के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से दवा व्यापारियों ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर नियंत्रण, बड़ी कंपनियों द्वारा दी जा रही भारी छूट पर रोक और बाजार में बढ़ती नकली दवाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। संघ का कहना है कि इन मुद्दों के कारण छोटे और मध्यम वर्ग के दवा व्यवसायी लगातार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
इससे पहले, बंद के समर्थन में दुर्ग जिला दवा विक्रेता संघ द्वारा एक जागरूकता रैली भी निकाली गई। यह रैली जीवन रेखा परिसर से प्रारंभ होकर पटेल चौक, ग्रीन चौक सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः जीवन रेखा परिसर में समाप्त हुई। रैली में बड़ी संख्या में दवा विक्रेता, व्यापारी और नागरिक शामिल हुए। सभी ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया।
संघ के अध्यक्ष वकार हसन कामदार और सचिव दीपक बंसल के नेतृत्व में निकली इस रैली में व्यापारियों ने एक स्वर में अपनी समस्याओं को रखा। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन फार्मेसी के बढ़ते प्रभाव से पारंपरिक दवा व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। साथ ही बड़ी कंपनियों द्वारा दी जा रही भारी छूट से बाजार का संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे छोटे दुकानदारों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।
संघ पदाधिकारियों ने यह भी बताया कि नकली दवाओं का कारोबार एक गंभीर समस्या बन चुका है, जिससे आम लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने सरकार से इस दिशा में ठोस और सख्त कदम उठाने की मांग की। पदाधिकारियों का कहना है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।
बंद के दौरान शहर के कई इलाकों में मरीजों और उनके परिजनों को दवाओं के लिए भटकना पड़ा, हालांकि संघ द्वारा की गई वैकल्पिक व्यवस्था से गंभीर मरीजों को कुछ हद तक राहत मिली। प्रशासन भी पूरे दिन स्थिति पर नजर बनाए रहा, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न फैले।
दुर्ग जिला दवा विक्रेता संघ ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों को मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से फैल रही गलत चिकित्सा जानकारी से दूर रखें और केवल प्रमाणित चिकित्सकों की सलाह पर ही दवाओं का उपयोग करें।
कुल मिलाकर, दुर्ग जिले में केमिस्ट बंद का व्यापक असर देखने को मिला। व्यापारियों की एकजुटता और शांतिपूर्ण तरीके से किए गए प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी मांगों को लेकर गंभीर हैं और शासन से जल्द समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं।
रिपोर्टर : धर्मेंद्र गुप्ता


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