7 सेकंड के वायरल वीडियो पर कार्रवाई से बवाल
रायपुर/दुर्ग : ग्राम पंचायत थनौद, जनपद पंचायत दुर्ग में आयोजित सुशासन शिविर के दौरान सामने आई एक घटना ने अब प्रदेशभर में बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। जनपद पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) रूपेश पांडे के निलंबन के खिलाफ अब पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी और कर्मचारी खुलकर विरोध में उतर आए हैं। इस पूरे मामले की जड़ में एक 7 सेकंड का वायरल वीडियो बताया जा रहा है, जिसके आधार पर की गई कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि सुशासन शिविर के दौरान हुई घटना का केवल एक छोटा सा हिस्सा, लगभग 7 सेकंड का वीडियो, सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इसी वीडियो को आधार बनाकर प्रशासन द्वारा सीईओ रूपेश पांडे पर निलंबन की कार्रवाई कर दी गई। हालांकि अब सामने आ रही विस्तृत जानकारी और अन्य फुटेज के आधार पर अधिकारी-कर्मचारी इस कार्रवाई को एकतरफा और जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बता रहे हैं।
इस मुद्दे को लेकर 02 जून 2026 को रायपुर में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग संघ, छत्तीसगढ़ की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेशभर से आए प्रतिनिधियों ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए निलंबन को तत्काल निरस्त करने की मांग की। संघ ने स्पष्ट कहा कि बिना निष्पक्ष जांच के केवल एक छोटे से वायरल वीडियो के आधार पर किसी अधिकारी के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि सुशासन शिविर के दौरान वास्तविक स्थिति कुछ और थी। उनका दावा है कि संबंधित वीडियो में पूरी घटना नहीं दिखाई गई है, बल्कि केवल एक छोटा हिस्सा सामने आया है, जिससे स्थिति की वास्तविकता स्पष्ट नहीं हो पाती। विस्तृत फुटेज में यह भी सामने आ रहा है कि सीईओ के साथ पहले दुर्व्यवहार किया गया, जिसके बाद प्रतिक्रिया स्वरूप घटनाक्रम हुआ। ऐसे में केवल आंशिक वीडियो के आधार पर की गई कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताया जा रहा है।
बैठक में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर एक निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया और शासन-प्रशासन के उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की गई। संघ ने अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से आग्रह किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए और तब तक के लिए निलंबन आदेश को निरस्त कर संबंधित अधिकारी को बहाल किया जाए।
संघ ने इस मामले को केवल एक अधिकारी का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के सम्मान और मनोबल से जुड़ा विषय बताया है। पदाधिकारियों का कहना है कि यदि बिना पूरी जांच के इस प्रकार की कार्रवाई होती रही, तो इससे अधिकारियों और कर्मचारियों के मन में असुरक्षा की भावना बढ़ेगी और वे स्वतंत्र रूप से अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर पाएंगे।
बैठक में आगे की रणनीति को लेकर भी विस्तृत निर्णय लिए गए। तय किया गया कि पंचायत मंत्री विजय शर्मा, अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा विकास आयुक्त, नया रायपुर को 7 दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके साथ ही प्रशासन को चेतावनी दी गई कि यदि निर्धारित समय सीमा में उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज किया जाएगा।
संघ के निर्णय के अनुसार, 11 जून से 15 जून 2026 तक प्रदेशभर के अधिकारी और कर्मचारी काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे, जिससे वे शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इस विरोध में विभाग के सभी वर्ग—CEO, APO, DEO, ADEO, पंचायत सचिव, स्वच्छ भारत मिशन (SBM) से जुड़े कर्मचारी, रोजगार सहायक तथा जनपद स्तर के समस्त कर्मचारी शामिल होंगे।
इसके बाद भी यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो 16 जून 2026 को जिला स्तर पर एक दिवसीय हड़ताल की जाएगी। संघ ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इसके बावजूद भी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसमें संभागीय और राज्य स्तरीय हड़ताल भी शामिल होगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। जहां एक ओर अधिकारी-कर्मचारी संगठन इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बता रहे हैं, वहीं प्रशासन पर निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सुशासन शिविर जैसे कार्यक्रम, जिनका उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का समाधान करना होता है, अब खुद विवादों के केंद्र में आ गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के मामलों में त्वरित कार्रवाई के साथ-साथ तथ्यों की पूरी जांच भी उतनी ही आवश्यक होती है, ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो। फिलहाल सभी की निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। यदि समय रहते इस विवाद का समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में प्रदेश में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कामकाज पर व्यापक असर पड़ सकता है।
रिपोर्टर : धर्मेंद्र गुप्ता
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