‘सुधर छत्तीसगढ़’ पर विक्की मिश्रा का सीधा प्रहार: “जनता को भ्रमित करने की नहीं, जवाब देने की जरूरत”

दुर्ग - ग्रामीण क्षेत्र के युवा नेता एवं जनपद पंचायत दुर्ग के पूर्व सभापति विक्की मिश्रा ने एक बार फिर मुखर होते हुए राज्य सरकार के ‘सुधर छत्तीसगढ़’ अभियान पर तीखा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने इसे सरकार की नाकामियों को ढकने की कोशिश बताते हुए कहा कि योजनाओं के नाम बदलने से हकीकत नहीं बदलती, बल्कि इससे जनता का भरोसा और कमजोर होता है। विक्की मिश्रा ने कहा कि हाल ही में संपन्न ‘सुशासन तिहार’ को बड़े स्तर पर प्रचारित किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत में यह पूरी तरह असरहीन साबित हुआ। आम लोगों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचा और शिकायतों का समाधान भी संतोषजनक नहीं रहा। ऐसे में उसी मॉडल को नए नाम ‘सुधर छत्तीसगढ़’ के रूप में पेश करना जनता के साथ छल जैसा है। उन्होंने सरकार से सीधे सवाल करते हुए कहा कि अगर पहले अभियान में सफलता मिली थी, तो फिर नए सिरे से शिविर लगाने की जरूरत क्यों पड़ी? कितने लोगों को वास्तविक लाभ मिला, इसका आंकड़ा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा? मिश्रा ने कहा कि सरकार को पारदर्शिता दिखानी चाहिए और आंकड़ों के साथ जवाब देना चाहिए।

मिश्रा ने यह भी कहा कि प्रदेश की जनता आज महंगाई, बेरोजगारी और बिगड़ती कानून व्यवस्था से जूझ रही है, लेकिन सरकार इन मूल समस्याओं से ध्यान हटाकर दिखावटी कार्यक्रमों में उलझी हुई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता अब जागरूक है और केवल नाम बदलकर योजनाओं को पेश करने से वह गुमराह नहीं होने वाली। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर सरकार वास्तव में सुधार चाहती है, तो उसे प्रचार से ज्यादा जमीनी काम पर ध्यान देना होगा। राशन, पेंशन, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर ठोस पहल ही असली ‘सुधार’ कहलाएगा। अंत में विक्की मिश्रा ने मांग की कि ‘सुशासन तिहार’ में खर्च हुई राशि और उसके वास्तविक परिणामों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा कि जवाबदेही से ही सरकार की नीयत साफ होगी और जनता का विश्वास दोबारा जीता जा सकेगा।

रिपोर्टर - धर्मेंद्र गुप्ता

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