गणपति विहार फेस-4 में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया हल षष्ठी पर्व

दुर्ग :  बोरसी स्थित गणपति विहार कॉलोनी फेस-4 में आज हल षष्ठी पर्व श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कॉलोनी की बड़ी संख्या में महिलाओं ने उपवास रखा और विधि-विधान से हल षष्ठी माता की पूजा-अर्चना कर अपनी संतान की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।
हल षष्ठी पर्व हिंदू धर्म में माताओं के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन माताएं अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना को लेकर व्रत रखती हैं। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी से भी जुड़ा हुआ है, जिन्हें हलधर के नाम से जाना जाता है। इसी कारण इस पर्व को हल षष्ठी के नाम से जाना जाता है।
गणपति विहार कॉलोनी में महिलाओं ने सुबह से ही पर्व की तैयारियां शुरू कर दी थीं। पूजा स्थल पर पारंपरिक तरीके से पूजन सामग्री सजाई गई। महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर हल षष्ठी माता का स्मरण किया तथा संतान की रक्षा और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की।
इस दौरान महिलाओं में पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक परिधान में महिलाएं पूजा में शामिल हुईं और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं। पूजा के दौरान महिलाओं ने हल षष्ठी व्रत से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और कथा का भी स्मरण किया।
महिलाओं का कहना था कि हल षष्ठी केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि मातृत्व की भावना, संतान के प्रति प्रेम और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए समर्पण का प्रतीक है। आधुनिक समय में भी महिलाएं अपनी पारंपरिक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को जीवित रखते हुए पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस पर्व को मनाती हैं।
गणपति विहार फेस-4 में आयोजित इस धार्मिक आयोजन से पूरे कॉलोनी का वातावरण भक्तिमय नजर आया। महिलाओं ने पूजा-अर्चना के बाद संतान और परिवार की खुशहाली की कामना करते हुए पर्व का समापन किया।

रिपोर्टर : धर्मेंद्र गुप्ता

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