DUSU चुनाव प्रचार में हिंसा पर दिल्ली HC सख्त, जीत के जुलूसों पर लगाई रोक

AKANSHA UPADHYAY

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव प्रचार के दौरान सामने आई हिंसा, कथित दबदबे और चुनावी नियमों के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद किसी भी तरह के विजय जुलूस पर रोक लगा दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि उम्मीदवार, उनके समर्थक, छात्र संगठन या अन्य कोई भी व्यक्ति सड़कों, कॉलेजों या हॉस्टलों के भीतर विजय जुलूस नहीं निकाल सकेगा।

भारी पुलिस बल के बावजूद हिंसा पर सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से सवाल किया कि जब नॉर्थ कैंपस में पर्याप्त पुलिस बल तैनात था, तब चुनाव प्रचार के दौरान बड़ी संख्या में वाहनों के काफिले और कथित हिंसक गतिविधियों को कैसे होने दिया गया। अदालत ने बिना नंबर प्लेट और उम्मीदवारों के नाम के वाहनों कि चुनाव से जुड़े नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने 49 वाहनों को जब्त किया, 5,400 से अधिक चालान किए औरिवक्ता प्रशांत मनचंदा ने अदालत के समक्ष दावा किया कि चुनाव प्रचार के दौरान कुछ उम्मीदवारों के साथ बाहरी लोगों की मौजूदगी में उपद्रव और मारपीट की घटनाएं के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए।अदालत ने तस्वीरों का हवाला देते हुए पूछा कि अगर 10-20 वाहनों का काफिला कैंपस और उसके आसपास घूम रहा था तो पुलिस ने उसे रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की। कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि उम्मीदवारों को गाड़ियों की छतों और बोनट पर खड़े होकर प्रचार करने की अनुमति कैसे मिली। अदालत के अनुसार, ऐसे काफिलों से छात्रों और आम लोगों के बीच डर और दबदबे का माहौल पैदा हो सकता है।

140 उम्मीदवारों को नोटिस

हाईकोर्ट ने DUSU चुनाव में मैदान में उतरे सभी 140 उम्मीदवारों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने पूछा है कि चुनाव के दौरान कथित तौर पर Lyngdoh Committee की सिफारिशों, चुनाव आचार संहिता और अदालत के पूर्व निर्देशों के उल्लंघन के लिए उनके खिलाफ हर्जाना क्यों न लगाया जाए। अदालत ने प्रमुख छात्र संगठनों को भी नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने संकेत दिया कि चुनावी नियमों के उल्लंघन और सार्वजनिक संपत्ति या विश्वविद्यालय परिसर को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के लिए exemplary costs लगाए जा सकते हैं। 

पुलिस की कार्रवाई का ब्यौरा

सुनवाई में दिल्ली पुलिस की ओर से बताया गया कि चुनाव से जुड़े नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने 49 वाहनों को जब्त किया, 5,400 से अधिक चालान किए और चार लोगों को गिरफ्तार किया। इसके बावजूद अदालत ने सवाल उठाया कि यदि पुलिस को नियमों के उल्लंघन की जानकारी थी, तो ऐसी गतिविधियों को शुरुआती स्तर पर प्रभावी ढंग से क्यों नहीं रोका गया।

पहले भी कोर्ट ने दी थी चेतावनी

यह मामला इससे पहले भी दिल्ली हाईकोर्ट के सामने आया था। 17 सितंबर को अदालत ने DUSU चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ की रिपोर्ट पर नाराजगी जताते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय और पुलिस से कार्रवाई का ब्यौरा मांगा था। अदालत ने चेतावनी दी थी कि यदि चुनावी नियमों के पालन और हिंसा रोकने के लिए उठाए गए कदम संतोषजनक नहीं पाए गए, तो वोटों की गिनती और परिणाम घोषित करने पर रोक लगाने जैसे कदम पर विचार किया जा सकता है। याचिकाकर्ता और अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा ने अदालत के समक्ष दावा किया कि चुनाव प्रचार के दौरान कुछ उम्मीदवारों के साथ बाहरी लोगों की मौजूदगी में उपद्रव और मारपीट की घटनाएं हुईं। याचिका में हथियारों के कथित इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया था। हालांकि, इन आरोपों को अदालत के समक्ष रखे गए पक्ष के रूप में देखा जाना चाहिए; इनके अंतिम तथ्यात्मक निष्कर्ष अलग प्रक्रिया में तय होंगे।विजय जुलूसों पर रोक के साथ हाईकोर्ट ने यह संदेश स्पष्ट किया है कि छात्र चुनावों में भी चुनावी नियमों और कानून का पालन अनिवार्य है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वह किसी भी प्रतिबंधित विजय जुलूस को होने न दे और उल्लंघन की स्थिति में कानूनी तथा प्रशासनिक कार्रवाई करे। 

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