7 दिन में 5 भूकंप! जनता में मची दहशत
हाल ही में म्यांमार में भूकंपों की बढ़ती गतिविधि ने लोगों में डर और बेचैनी पैदा कर दी है। 7 फरवरी 2026 को म्यांमार में सुबह 3:01 बजे 3.9 तीव्रता का भूकंप आया, जो 85 किलोमीटर की गहराई में महसूस किया गया। इसके कुछ दिन पहले, 3 फरवरी को 5.3 तीव्रता और 20 किलोमीटर गहराई का भूकंप आया था, जबकि 2 और 6 फरवरी को क्रमशः 4.5 और 4.9 तीव्रता के झटके महसूस किए गए।
म्यांमार के सागिंग, मांडले, बागो और यंगून जैसे शहर भूकंप जोखिम वाले क्षेत्र में आते हैं। इन इलाकों में म्यांमार की लगभग 46% आबादी रहती है। खासकर यंगून में घनी आबादी और फॉल्ट लाइनों के पास होने की वजह से खतरा ज्यादा है।
भूकंप की गंभीरता गहराई पर भी निर्भर करती है। उथले भूकंप सतह पर ज्यादा नुकसान कर सकते हैं, जबकि गहरे भूकंप का असर कम होता है। म्यांमार में भारतीय, यूरेशियन, सुंडा और बर्मा प्लेट्स के मिलने की वजह से भूगर्भीय गतिविधियां लगातार होती रहती हैं। लंबे तटीय क्षेत्र और फॉल्ट लाइनों की वजह से सुनामी का खतरा भी बना रहता है।
भूकंप आने पर सावधानियाँ:
- झटका आते ही ड्रॉप, कवर और होल्ड ऑन करें।
- खिड़कियों और भारी सामान से दूर रहें।
- इमारत से बाहर भागने की कोशिश न करें।
- बिजली और गैस बंद कर दें।
- तटीय इलाकों में सुनामी की चेतावनी पर ऊंची जगह पर जाएं।
- आपातकालीन किट तैयार रखें।
भारत के पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में भी इन भूकंपों के झटके महसूस किए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि म्यांमार जैसे भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करना और मजबूत इमारतों का निर्माण करना बेहद जरूरी है।

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