5 राज्यों में चुनाव की घोषणा के बाद चुनाव आयोग ने जारी किए नए आदेश...

चुनाव आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) को कड़ाई से लागू करने का आदेश जारी किया है।
 
आयोग के मुताबिक, इन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 5,173 से अधिक उड़न दस्ते और 5,200 से ज्यादा स्थिर निगरानी टीमें (SST) तैनात की गई हैं, ताकि किसी भी शिकायत का निवारण 100 मिनट के भीतर किया जा सके। एक दिन पहले ही आयोग ने इन राज्यों में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की थी।
 
साथ ही, आयोग ने छह अन्य राज्यों में भी आचार संहिता लागू करने के निर्देश दिए हैं, जहां आठ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होंगे। चुनावी राज्यों में एमसीसी केंद्रीय सरकार पर भी लागू होगा, यानी चुनाव से संबंधित कोई नीतिगत घोषणा या निर्णय नहीं लिया जा सकेगा। चुनाव की घोषणा के साथ ही सभी विधायक और सांसदों के निधियों के जारी होने पर रोक लगा दी गई है।
 
केंद्रीय मंत्रिमंडल सचिव और राज्य मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में आयोग ने चुनाव आचार संहिता के सभी प्रावधान तुरंत लागू करने को कहा है। इसमें निजी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाना, सरकारी वाहनों का दुरुपयोग रोकना, सरकारी विज्ञापन पर रोक, सरकारी वेबसाइटों से राजनीतिक पदाधिकारियों की तस्वीरें हटाना और सार्वजनिक स्थानों का चुनावी उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग न होने देना शामिल है।
 
जिला स्तर पर 24 घंटे सक्रिय नियंत्रण कक्ष बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिसमें जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी पर्याप्त स्टाफ सुनिश्चित करेंगे। मंत्रीगण अपनी सरकारी यात्राओं को चुनाव प्रचार से अलग रखें और सरकारी संसाधनों का चुनावी उपयोग न करें।
 
चुनावी पार्टियों को याद दिलाया गया कि उन्हें सार्वजनिक सभाओं और जुलूसों के बारे में पुलिस अधिकारियों को पहले सूचित करना होगा ताकि यातायात और सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
 
आदर्श आचार संहिता क्या है?
 
आदर्श आचार संहिता चुनाव आयोग द्वारा चुनावी अवधि में राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए जारी की जाने वाली गाइडलाइन है, जिसका उद्देश्य स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करना है। यह चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ लागू होती है और मतदान खत्म होने तक लागू रहती है।
 
एमसीसी लागू होने के बाद नियम
 
-धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर किसी भी तरह की अपील नहीं की जा सकती।
 
-विरोधियों की आलोचना केवल उनके कार्यों, नीतियों और कार्यक्रमों पर होनी चाहिए, निजी जीवन पर नहीं।
 
-सरकारी मीडिया का सत्ताधारी दल के पक्ष में पक्षपातपूर्ण उपयोग नहीं किया जा सकता।
 
-मतदान केंद्रों के पास प्रचार, डराने-धमकाने या प्रलोभन देने जैसी गतिविधियाँ प्रतिबंधित हैं।
 
-निजी संपत्ति या भवनों का चुनाव प्रचार के लिए अनधिकृत उपयोग नहीं किया जा सकता।
 
-सभी जुलूस और बैठकों की जानकारी अधिकारियों को पहले देनी होगी, तय मार्ग और समय का पालन करना होगा।
 
-अन्य जुलूसों से टकराव से बचना होगा और लाउडस्पीकर के लिए अनुमति लेना जरूरी है।
 
-मतदान केंद्रों के पास शराब या भीड़भाड़ नहीं होनी चाहिए।
 
-सरकारें चुनाव प्रचार के लिए सरकारी मशीनरी, धन या पदों का उपयोग नहीं कर सकतीं, न ही कोई नई परियोजनाओं, बुनियादी ढांचा वादों या तदर्थ नियुक्तियों की घोषणाएं कर सकती हैं।

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