श्रावण 2026 में दो ग्रहणों को लेकर डर या सिर्फ अफवाह? जानिए सच्चाई और ज्योतिषीय मत

सावन के इस वर्ष (30 जुलाई से 28 अगस्त 2026) को लेकर लोगों में इसलिए चर्चा बढ़ गई है क्योंकि इस दौरान दो ग्रहण—एक सूर्य ग्रहण और एक चंद्र ग्रहण—पड़ रहे हैं। कई लोग इसे किसी अशुभ संकेत या संभावित संकट से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि ऐसी आशंकाएं निराधार हैं।

सावन महीना वैसे भी भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ रहती है। झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम जैसे प्रमुख तीर्थों में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की विशेष उपस्थिति देखी जाती है। मान्यता है कि सावन में शिवजी की पूजा, रुद्राभिषेक, व्रत और जलाभिषेक करने से विशेष फल प्राप्त होता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

सावन 2026 की अवधि
साल 2026 में सावन 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। इस पूरे महीने शिवभक्ति और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व रहेगा। इसी बीच दो खगोलीय घटनाएं होने के कारण लोगों में जिज्ञासा और चिंता दोनों देखी जा रही है।

ज्योतिषाचार्य की राय
देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल के अनुसार, सावन में दो ग्रहण होना सामान्य खगोलीय घटना है और इसे किसी बड़े संकट या अशुभ संकेत के रूप में नहीं देखना चाहिए। उनके मुताबिक ग्रहण का प्रभाव उसकी दृश्यता और स्थान के अनुसार बदलता है, इसलिए केवल ग्रहण की सूचना से डरने की जरूरत नहीं है।

सूर्य ग्रहण का विवरण
साल 2026 का अंतिम सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को अमावस्या के दिन होगा। यह भारतीय समयानुसार रात 8:04 बजे शुरू होकर देर रात 1:07 बजे समाप्त होगा। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाएगा। ऐसे में मंदिरों में पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से चलती रहेंगी।

चंद्र ग्रहण का विवरण
इसके लगभग 15 दिन बाद, 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण सुबह 8:04 बजे से 11:22 बजे तक रहेगा। यह भी भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए इसका सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाएगा।

धार्मिक प्रभाव पर स्थिति
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, क्योंकि दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, इसलिए इनका सावन की धार्मिक गतिविधियों—जैसे कांवड़ यात्रा, जलाभिषेक और पूजा-पाठ—पर कोई असर नहीं पड़ेगा। श्रद्धालु पहले की तरह पूरे श्रद्धा भाव से भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, विशेषज्ञों का कहना है कि इन ग्रहणों को लेकर डर या अफवाहों में जाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि ये केवल खगोलीय घटनाएं हैं और इनका धार्मिक अनुष्ठानों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं माना गया है।

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