आर्थिक सर्वेक्षण 2025‑26: भारत की विकास यात्रा और आर्थिक तस्वीर

आर्थिक सर्वेक्षण भारत सरकार की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक रिपोर्टों में से एक है, जिसे हर साल संसद में बजट से पहले पेश किया जाता है। यह रिपोर्ट पिछले वित्तीय वर्ष की उपलब्धियों, कमजोरियों, आर्थिक रुझानों और आने वाले वर्ष के लिए नीतिगत संकेतों का विस्तृत विश्लेषण देती है। 

 

1. रिपोर्ट का उद्देश्य और प्रस्तुति

  • आर्थिक सर्वेक्षण 2025‑26 को 29 जनवरी 2026 को केंद्र सरकार ने संसद में पेश किया।
  • इसका मकसद बजट से पहले देश की आर्थिक स्थिति, वृद्धि की संभावनाएँ और मौजूदा चुनौतियाँ स्पष्ट करना है। 

 

2. GDP और आर्थिक विकास का अनुमान

GDP वृद्धि दर

  • FY26 (2025‑26) के लिए भारत की GDP वृद्धि दर लगभग 7.4% रहने का अनुमान पेश किया गया है, जो विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ में से एक है। 
  • इससे पहले अनुमान में 6.3% से 6.8% के बीच वृद्धि की बात कही गई थी, जो अपने आप में मजबूत मजबूती को दर्शाता है।

यह संकेत है कि भारत की अर्थव्यवस्था कोविड‑19 के बाद भी स्थिर रूप से बढ़ रही है और विकास दर में मजबूती आ रही है। 


3. कीमतों में स्थिरता: महंगाई का नियंत्रण

  • सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में महंगाई दर (inflation) कई वर्षों में सबसे नीचे देखी गई है। खाद्य वस्तुओं में कीमतों में गिरावट ने उपभोक्ताओं की खरीद शक्ति मजबूत की है। 
  • सीपीआई (CPI) आधारित महंगाई कुछ महीनों में न्यूनतम स्तर पर पहुंची है, जिससे लोगों पर आर्थिक दबाव कम हुआ है और अर्थव्यवस्था को गति मिली है। 

 

4. क्षेत्र‑वार प्रदर्शन (Agriculture, Industry & Services)

कृषि और उसके सहायक क्षेत्र

  • कृषि व उससे जुड़े क्षेत्र (जैसे पशुपालन और मत्स्य पालन) ने 3.1% तक की वृद्धि दिखाई है।
  • अनुकूल मानसून और बेहतर उत्पादन ने ग्रामीण मांग को मजबूती प्रदान की है। 

उद्योग और विनिर्माण

  • निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी अच्छी वृद्धि देखी गई है, जो देश की उत्पादन क्षमता और निवेश धारणा को मजबूत करता है।
  • उद्योग के विस्तार में इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और मशीनरी जैसे क्षेत्रों ने विशेष भूमिका निभाई है। 


 सेवा क्षेत्र (Services)

  • सेवा क्षेत्र GDP का सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है और इसने सकल मूल्य संवर्धन (GVA) में लगभग 9% तक की वृद्धि दिखाई है। 
  • डिजिटल सेवाएँ, वित्तीय सेवाएँ और व्यापार इस वृद्धि में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

 

5. घरेलू मांग और उपभोग

  • सर्वेक्षण के अनुसार घरेलू मांग (Domestic Demand) कंपनी, व्यवसाय, और जनता की खरीद क्षमता में वृद्धि के कारण मजबूत बनी हुई है।
  • निजी उपभोग (Private Consumption) GDP का लगभग 61.5% तक पहुंच गया है — यह पिछले कई वर्षों में सबसे ऊँचा स्तर है। 

 

6. निर्यात और बाहरी खाता

  • भारत के कुल निर्यात में मजबूती बनी हुई है और वस्तु तथा सेवा निर्यात ने रिकॉर्ड स्तर हासिल किया है।
  • यह वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बावजूद भारतीय निर्यातकों की मजबूती को दर्शाता है। 

 

7. फिस्कल (राजकोषीय) अनुशासन और निवेश

  • भारत ने राजकोषीय घाटे को संतुलित करने के साथ निवेश को बढ़ाने पर जोर दिया है।
  • सरकारी पूंजीगत व्यय (Capex) में वृद्धि और निजी निवेश के संकेत अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक नींव को मजबूत कर रहे हैं। 

 

8. दीर्घकालिक दृष्टिकोण और नीतिगत संकेत

भविष्य की चुनौतियाँ

  • वैश्विक आर्थिक उथल‑पुथल, मुद्रास्फीति के उतार‑चढ़ाव और विनिर्माण क्षेत्र की मंदी जैसी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं, जिन पर सतर्कता की जरूरत है। 


देश का लक्ष्य

  • सर्वेक्षण में दीर्घकालिक मजबूत वृद्धि, निवेश और रोजगार पर ध्यान केंद्रित करते हुए समग्र आर्थिक मजबूती का संदेश दिया गया है।
  • विकसित भारत की दिशा में निरंतर सुधार और सुधारात्मक नीतियाँ अपनाने की बात कही गई है। 

 

आर्थिक सर्वेक्षण 2025‑26 ने स्पष्ट किया है कि भारत:

  • दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। 
  • महंगाई को नियंत्रण में रखते हुए घरेलू मांग को बढ़ाया है। 
  • सेवा, उद्योग और कृषि सभी क्षेत्रों में संतुलित विकास दिखा रहा है। 

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद उचित राजकोषीय और नीतिगत दृष्टिकोण अपनाए जा रहे हैं। 

यह रिपोर्ट न केवल वर्तमान आर्थिक स्थिति का सटीक चित्र देती है, बल्कि आगे की आर्थिक नीतियों, निवेश निर्णयों और रणनीति निर्धारण के लिए भी एक मार्गदर्शक दस्तावेज़ है।

 

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