चुनावी रण का बिगुल: 9 अप्रैल से असम-केरल-पुडुचेरी में मतदान, बंगाल-तमिलनाडु में बाद के चरण

देश में एक बार फिर लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व शुरू होने जा रहा है। चुनाव आयोग ने 2026 में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है, जिसके साथ ही देश की राजनीति में चुनावी हलचल तेज हो गई है। इस बार जिन राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं उनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी शामिल हैं। चुनाव आयोग की घोषणा के अनुसार असम, केरल और पुडुचेरी में एक ही चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में मतदान 23 अप्रैल से शुरू होगा। सभी राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

इन चुनावों को 2026 का सबसे बड़ा राजनीतिक मुकाबला माना जा रहा है क्योंकि पांचों राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल मई और जून के बीच समाप्त हो रहा है, इसलिए संवैधानिक प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग को समय रहते चुनाव कराना जरूरी है। चुनाव आयोग ने कहा है कि चुनाव शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से कराने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियां की जा रही हैं। इसके साथ ही सभी राज्यों में आदर्श आचार संहिता भी लागू कर दी गई है, जिसके बाद राजनीतिक दलों ने अपने चुनावी अभियान को तेज कर दिया है।

असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को होने वाला मतदान काफी अहम माना जा रहा है। असम में सत्तारूढ़ दल अपनी सरकार को दोबारा बनाने की कोशिश करेगा, जबकि विपक्ष इस बार मजबूत चुनौती देने की रणनीति बना रहा है। केरल में परंपरागत रूप से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलती है और इस बार भी राजनीतिक मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। वहीं पुडुचेरी में भी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों के बीच सत्ता की लड़ाई देखने को मिलेगी।

दूसरी ओर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव भी राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हैं। पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे, जो पहले की तुलना में कम चरणों में संपन्न होंगे। यहां मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ दल और प्रमुख विपक्षी दलों के बीच माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बंगाल का चुनाव राष्ट्रीय स्तर पर भी काफी असर डाल सकता है क्योंकि यहां का राजनीतिक माहौल लंबे समय से बेहद गर्म रहा है।

तमिलनाडु में भी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। राज्य में क्षेत्रीय दलों का प्रभाव हमेशा से मजबूत रहा है और इस बार भी गठबंधन राजनीति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। चुनाव आयोग ने बताया कि मतदान के बाद सभी राज्यों की मतगणना 4 मई को एक साथ की जाएगी, जिसके बाद नई सरकारों के गठन का रास्ता साफ होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 के ये विधानसभा चुनाव सिर्फ राज्यों की राजनीति ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकते हैं। आने वाले हफ्तों में चुनावी रैलियां, घोषणापत्र और राजनीतिक रणनीतियां इस चुनावी माहौल को और भी गरमा देंगी। फिलहाल चुनावी तारीखों के ऐलान के साथ ही देश में लोकतंत्र का महापर्व शुरू हो चुका है और अब सभी की नजरें अप्रैल और मई में होने वाले इस बड़े चुनावी मुकाबले पर टिकी हुई हैं।

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