निर्वाचन आयोग और SIR विवाद पर गहराया सियासी संकट: विपक्ष की योजना और बीजेपी का पलटवार

देश की राजनीतिक फिजा में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर लगातार घमासान मचा हुआ है। एक तरफ जहाँ विपक्षी दलों का गठबंधन इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए एक बड़े आंदोलन और बैठक की रूपरेखा तैयार कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष भी इस राजनीतिक चुनौती का डटकर मुकाबला करने की तैयारी में जुट गया है। इसी बीच उत्तर प्रदेश के पीलीभीत निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठे हैं, जिसके बाद आयोग ने त्वरित कदम उठाते हुए सख्त प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई है।

पीलीभीत मतदाता सूची संशोधन में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा और आयोग का एक्शन

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र से जुड़े वोटर लिस्ट विवाद ने विपक्षी दलों को सरकार और चुनाव आयोग को घेरने का बड़ा मौका दे दिया है। कांग्रेस पार्टी ने दस्तावेजों के हवाले से आरोप लगाया कि क्षेत्र में हजारों की संख्या में मतदाताओं के पहचान पत्र नंबर और सीरियल नंबर बिल्कुल समान रखते हुए उनके नाम में बदलाव कर दिए गए। इसके साथ ही, सैकड़ों वैध मतदाताओं के नाम सूची से चुपचाप हटाए जाने और कई ऐसे नाम जोड़े जाने का दावा किया गया जो उस इलाके में रहते ही नहीं हैं। इस बड़े खुलासे के बाद हड़कंप मच गया और चुनाव आयोग ने तत्परता दिखाते हुए संबंधित रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और डेटा ऑपरेटर को तुरंत प्रभाव से मतदाता सूची के सभी कार्यों से अलग कर दिया। इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिला प्रशासन से दो दिनों के भीतर मामले की पूरी जाँच रिपोर्ट तलब की है।

विपक्षी दलों की एकजुटता, 1 नवंबर की दिल्ली रैली और संभावित विधायी कदम

विपक्ष द्वारा बुलाई जाने वाली आगामी साझा बैठक को लेकर सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है, जिसमें आगामी 1 नवंबर को राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाली राष्ट्रव्यापी रैली की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक के दौरान केंद्र सरकार द्वारा संसद के संभावित विशेष सत्र में 'महिला आरक्षण अधिनियम' को लागू करने और परिसीमन से जुड़े संशोधनों पर भी गहन मंथन किया जा सकता है। विपक्षी नेताओं ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वे 'वोट चोरी' और चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ अपनी इस कानूनी तथा राजनीतिक लड़ाई को उसके अंतिम अंजाम तक लेकर जाएंगे, जिसकी शुरुआत वे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके और लगातार प्रदर्शन करके कर चुके हैं।

सीजेपी के तीखे तेवर और बीजेपी का राष्ट्रव्यापी 'लोकतंत्र बचाओ' अभियान

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जारी विरोध के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं ने जेल से बाहर आते ही अपनी आक्रामक तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। सीजेपी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों को अपने पद से हटना चाहिए और वे आने वाले दिनों में देश के कई बड़े महानगरों में अपने अगले विरोध प्रदर्शन की घोषणा कर सकते हैं। इन तमाम राजनीतिक हमलों से निपटने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने चुनावी प्रबंधन की धार तेज कर दी है। बीजेपी आज से 5 नवंबर 2026 तक देश भर में बड़े पैमाने पर ‘लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ’ अभियान चलाने जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य जनता के बीच SIR की प्रक्रिया की सच्चाई को रखना और विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करना है।

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.