रूपा गांगुली: ‘महाभारत’ की द्रौपदी से पश्चिम बंगाल की राजनीति तक का सफर
रूपा गांगुली एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने अभिनय और राजनीति दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। टीवी के चर्चित धारावाहिक महाभारत में द्रौपदी का दमदार किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में लोकप्रियता हासिल की थी। अब पश्चिम बंगाल की राजनीति में उनका नाम फिर से सुर्खियों में है। राज्य में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद चर्चा तेज है कि रूपा गांगुली को डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी मिल सकती है। ऐसे में उनके जीवन, करियर और राजनीतिक सफर को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है।
कोलकाता से है खास जुड़ाव

रूपा गांगुली का जन्म 25 नवंबर 1966 को पश्चिम बंगाल के कल्याणी में हुआ था। उनका पालन-पोषण कोलकाता में हुआ, जहां उन्होंने अपनी स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने बेलतल्ला गर्ल्स हाई स्कूल से स्कूली शिक्षा हासिल की और बाद में कोलकाता यूनिवर्सिटी से बीए की डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया।
अभिनय करियर की शुरुआत
रूपा गांगुली मूल रूप से बंगाली अभिनेत्री हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बंगाली टीवी सीरियल ‘मुक्तबंध’ से की थी। हिंदी टीवी इंडस्ट्री में उन्हें पहला मौका ‘गणदेवता’ सीरियल से मिला। इसके बाद उन्होंने फिल्मों में भी काम किया। उनकी पहली बंगाली फिल्म ‘निरुपमा’ थी। वहीं हिंदी फिल्मों में उन्होंने साहेब, एक दिन अचानक, सौगंध और प्यार का देवता जैसी फिल्मों में अभिनय किया।
‘महाभारत’ से मिली बड़ी पहचान

रूपा गांगुली को असली पहचान बी आर चोपड़ा के मशहूर धारावाहिक महाभारत से मिली। शो में उन्होंने द्रौपदी का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने बेहद पसंद किया। उनके प्रभावशाली अभिनय ने उन्हें रातोंरात लोकप्रिय बना दिया। आज भी लोग उन्हें द्रौपदी के किरदार के लिए याद करते हैं।
निजी जीवन और राजनीति में एंट्री
रूपा गांगुली ने साल 1992 में ध्रबो मुखर्जी से शादी की थी, जो पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर थे। हालांकि कुछ वर्षों बाद दोनों के रिश्तों में दूरियां आ गईं और 2006 में वे अलग रहने लगे। बाद में दोनों का तलाक हो गया। उनका एक बेटा है, जिसका नाम आकाश मुखर्जी है।
अभिनय में सफलता हासिल करने के बाद रूपा गांगुली ने 2015 में बीजेपी का दामन थामा। उन्होंने हावड़ा नॉर्थ सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पार्टी ने उनकी क्षमता को देखते हुए 2016 में उन्हें राज्यसभा भेजा। अब पश्चिम बंगाल की राजनीति में उनका नाम एक बार फिर चर्चा में बना हुआ है।


No Previous Comments found.