Alpha Review: स्पाई यूनिवर्स की सबसे कमजोर कड़ी साबित हुई 'अल्फा', न कहानी, न एक्शन और न एक्टिंग ने किया प्रभावित
यशराज स्पाई यूनिवर्स की नई फिल्म 'अल्फा' से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन फिल्म उन उम्मीदों पर खरी उतरती नजर नहीं आती. कमजोर कहानी, बिना लॉजिक वाले सीन, फीका एक्शन और कलाकारों का प्रभावहीन प्रदर्शन इस फिल्म को निराशाजनक बना देता है. फिल्म की शुरुआत से लेकर क्लाइमैक्स तक कई ऐसे पल आते हैं, जहां दर्शकों को रोमांच की जगह निराशा हाथ लगती है.
कमजोर कहानी और घिसा-पिटा फॉर्मूला
फिल्म की कहानी 'अल्फा' नाम के एक प्रोग्राम पर आधारित है. इसमें बॉबी देओल सीता नाम की एक लड़की को पाल-पोसकर बड़ा करते हैं और उसे एक खास मिशन पर भेजते हैं.हालांकि, अल्फा कौन है, उसका परिवार कहां है, बॉबी देओल को वह कैसे मिली और मिशन का क्या अंजाम होता है, जैसे सवालों का जवाब फिल्म में देखने को मिलता है. लेकिन कहानी में ऐसा कोई नया तत्व नहीं है जो दर्शकों को बांधे रख सके. फिल्म पूरी तरह उसी पुराने स्पाई फॉर्मूले पर चलती है, जिसे दर्शक अब पसंद नहीं कर रहे हैं.
डायरेक्शन और एक्शन दोनों कमजोर
फिल्म में कई ऐसे सीन हैं, जो लॉजिक से बिल्कुल परे नजर आते हैं. एक तरफ जहां फिल्म में बारीक डिटेलिंग की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर कई घटनाएं हंसी का कारण बनती हैं. उदाहरण के तौर पर, एक सीन में पिता और बेटी पहले डांस वाली जगह पर होते हैं, लेकिन बातचीत करने के लिए अचानक स्टेडियम पहुंच जाते हैं. वहीं एक एजेंट किसी के घर से निकलने के बाद रुककर उसी व्यक्ति को बाहर निकलने के लिए कहता है. ऐसे कई दृश्य फिल्म को कमजोर बनाते हैं. एक्शन सीक्वेंस भी प्रभाव छोड़ने में पूरी तरह असफल रहते हैं, जबकि बीच-बीच में आने वाले गाने फिल्म की रफ्तार को और धीमा कर देते हैं.
एक्टिंग भी नहीं बचा पाई फिल्म
आलिया भट्ट शानदार अभिनेत्री मानी जाती हैं, लेकिन इस फिल्म में उनका प्रदर्शन प्रभावित नहीं करता. एक्शन सीन्स में वह सहज नहीं दिखतीं और कई जगह उनके एक्सप्रेशन ओवरएक्टिंग जैसे महसूस होते हैं. शरवरी भी अपने किरदार में कोई खास असर नहीं छोड़ पातीं। बॉबी देओल का स्क्रीन प्रेजेंस अच्छा है, लेकिन उनका हरियाणवी एक्सेंट काफी बनावटी और इरिटेटिंग लगता है. वहीं अनिल कपूर अपने किरदार में ठीक-ठाक नजर आते हैं.
राइटिंग और निर्देशन पर उठे सवाल
फिल्म की कहानी उदय चोपड़ा ने लिखी है, लेकिन स्क्रिप्ट में नयापन और दम दोनों की कमी दिखाई देती है. कहानी दर्शकों को भावनात्मक या रोमांचक रूप से जोड़ने में असफल रहती है. वहीं निर्देशक शिव रवैल का निर्देशन भी कमजोर नजर आता है, जिससे फिल्म का असर और कम हो जाता है.
कुल मिलाकर 'अल्फा' स्पाई यूनिवर्स की सबसे कमजोर फिल्मों में से एक साबित होती है. फिल्म में न दमदार कहानी है, न प्रभावशाली एक्शन और न ही ऐसा अभिनय जो दर्शकों को बांध सके. यदि स्पाई यूनिवर्स को आगे भी दर्शकों का भरोसा बनाए रखना है, तो उसे पुराने फॉर्मूले से बाहर निकलकर कुछ नया और बेहतर पेश करना होगा.
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