डीएम प्रेमरंजन सिंह के नेतृत्व में एटा ने रचा इतिहास

एटा : स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में जिलाधिकारी प्रेमरंजन सिंह के कुशल नेतृत्व और प्रशासनिक समर्पण ने एटा को एक नई पहचान दी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित वीएचएसएनडी (Village Health Sanitation and Nutrition Day) कार्यक्रम में उल्लेखनीय सुधार करते हुए जनपद एटा ने प्रदेश स्तर पर सातवीं रैंक हासिल की है।

यूनीसेफ द्वारा जारी अक्टूबर 2025 की रैंकिंग में एटा ने यह सफलता पाई है — जो जिले के लिए गर्व का विषय है।

सितंबर माह में एटा की रैंकिंग 12वीं थी, जिसे जिला प्रशासन ने अक्टूबर में सुधारते हुए सातवें स्थान तक पहुंचाया।
यह उपलब्धि साबित करती है कि “सशक्त नेतृत्व और टीमवर्क से किसी भी जनपद को विकास के मानचित्र पर अग्रणी बनाया जा सकता है।”

 हर गांव तक पहुंचा टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर फोकस

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हर बुधवार और शनिवार को आयोजित टीकाकरण सत्रों की सघन मॉनिटरिंग की।
इन सत्रों में 0–5 वर्ष के बच्चों का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया गया, साथ ही 10–16 वर्ष के किशोरों, गर्भवती महिलाओं और मातृ स्वास्थ्य जांचों पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने कहा—
जिलाधिकारी प्रेमरंजन सिंह के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं ने मिलकर एटा को प्रदेश के अग्रणी जिलों में शामिल किया है।  निगरानी, समर्पण और व्यवस्था का मॉडल बना एटा जिला प्रशासन की पहल पर सभी ब्लॉक स्तरीय अधिकारी माइक्रोप्लान के अनुसार फील्ड में जाकर टीकाकरण सत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। पंचायत भवन, प्राथमिक स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर आयोजित सत्रों में जिलाधिकारी की सख्त मॉनिटरिंग से पारदर्शिता और नियमितता सुनिश्चित हुई है।
एटा में टीकाकरण केंद्रों पर तख्त, पर्दे और पीने के पानी की व्यवस्था, गर्भवती महिलाओं के लिए एएनसी जांच किट, और स्वास्थ्य परामर्श सत्र जैसे कदमों ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल दी है।
स्वस्थ एटा – विकसित एटा” की दिशा में ठोस कदम डीएम प्रेमरंजन सिंह के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग ने न केवल रैंकिंग सुधारी, बल्कि जनजागरूकता में भी नया कीर्तिमान स्थापित किया।
घर-घर स्वास्थ्य अभियान, पोषण और स्वच्छता पर सामुदायिक संवाद, और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा जैसे प्रयासों से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है।
जिलाधिकारी प्रेमरंजन सिंह ने कहा —
 एटा की यह सफलता सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। जब अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक साथ चलते हैं, तब विकास की गति स्वतः बढ़ती है।
 राज्य स्तर पर मिली सराहना यूनीसेफ की टीम ने एटा के स्वास्थ्य तंत्र को “प्रभावी निगरानी और जमीनी क्रियान्वयन का मॉडल जिला” बताया है। मुख्य चिकित्साधिकारी ने भी आशा, एएनएम, सीएचओ, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और निगरानी टीमों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है।
 मुख्य उपलब्धियां एक नज़र में: यूनीसेफ रैंकिंग में प्रदेश में 7वां स्थान सितंबर की 12वीं रैंक से 5 पायदान की छलांग–5 वर्ष तक के बच्चों का शत-प्रतिशत टीकाकरण गर्भवती महिलाओं की सभी प्रसव पूर्व और पश्चात जांचें सुनिश्चित नियमित मॉनिटरिंग और ब्लॉक स्तर पर समीक्षा बैठकों से पारदर्शिता।

रिपोर्टर - लखन यादव 

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