श्रवण गंगा प्राकृतिक कृषि फार्म एवं ग्रामीण स्वावलम्बन प्रशिक्षण केन्द्र का शुभारंभ

एटा अवागढ़ - विकास खंड  के गांव लालपुर में श्रवण गंगा प्राकृतिक कृषि फार्म एवं ग्रामीण स्वावलम्बन प्रशिक्षण केन्द्र का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर प्राकृतिक खेती संवाद कार्यक्रम में बृज क्षेत्र सहित कई जनपदों से आए किसानों, कृषि विशेषज्ञों एवं प्राकृतिक खेती से जुड़े कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।
 मुख्य अतिथि प्रोफेसर डॉ. बलजीत सिंह साहरण ने प्राकृतिक खेती को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्पष्ट करते हुए कहा कि यह खेती पद्धति पर्यावरण संरक्षण के साथ मानव स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने का स्थायी समाधान है और स्थानीय संसाधनों पर आधारित खेती से लागत में भारी कमी लाई जा सकती है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ मनीष सिंह ने कहा प्राकृतिक खेती देश के छोटे और सीमांत किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने इसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए जनआंदोलन का स्वरूप देने पर जोर दिया। मुख्य वक्ता आत्मनिर्भर किसान संजीव कुमार निसुर्खा तथा हर्ष कुमार सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए कम लागत में अधिक उत्पादन वाले प्राकृतिक खेती मॉडल प्रस्तुत किए। प्रमुख मार्गदर्शक भारतीय किसान यूनियन भानू के प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप सिंह ने किसानों की एकजुटता और संगठनात्मक मजबूती को प्राकृतिक खेती की सफलता की कुंजी बताया। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को विभागीय योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा आधुनिक तकनीकी मार्गदर्शन की जानकारी दी।
संयोजक केपी सिंह ठैनुआ ने कहा कि यह प्रशिक्षण केन्द्र प्राकृतिक खेती, गौ आधारित कृषि एवं ग्रामीण स्वावलम्बन के क्षेत्र में किसानों को निरंतर प्रशिक्षण और व्यवहारिक सहयोग प्रदान करेगा। श्रवण गंगा सेवा समिति के सचिव सूर्य प्रताप सिंह ने आभार जताया। समापन प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने के संकल्प के साथ हुआ। इस अवसर पर आगरा से विष्णु कटारा, अनुराग ठाकुर, अमित कुमार सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे।जीवामृत तैयार कर उसका व्यवहारिक प्रदर्शन भी किया गया।

रिपोर्टर - लखन यादव

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