निज पूर्वजों के सद्गुणों पर गर्व जो करती नहीं-चाय पर हुई साहित्य चर्चा,डॉ. यादवेंद्र के साहित्यिक कृतित्व पर किया चिंतन

एटा - एटा क्लब में चाय पर साहित्यिक चर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में बुद्धिजीवियों ने साहित्य मनीषी डॉ. यादवेंद्र आमोरिया के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए। साहित्यकारों ने साहित्यिक अवदान, सामाजिक सरोकारों तथा उनकी रचनात्मक दृष्टि पर विस्तार से प्रकाश डाला।  कवि बलराम सरस ने जिजीविषा तथा कर्तव्यनिष्ठा से परिपूर्ण शोध पत्र का वाचन किया। हिंदी साहित्य के समालोचक डॉ केपी सिंह ने डॉ आमोरिया के गद्य लेखन पर कहा कि वे धारा से अलग तथा धारा से आगे चलने वाले लेखक थे। उनके साहित्य में एक समाज सुधारक की संवेदना, सहानुभूति तथा ओजस्विता स्पष्ट दिखाई देती है।
संचालन डॉ. ओम ऋषि भारद्वाज तथा अध्यक्षता आचार्य डॉ. प्रेमी राम मिश्र ने की। उन्होंने कहा कि वे मात्र कवि ही नहीं थे, अपितु काव्य प्रतिभा के अनुपम उदाहरण थे। उनकी कविता में तन्मयता और संवेदनशीलता का दुर्लभ संयोग है। प्रतीक आमौरिया सीए ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पक्तियां सुनाईं - निज पूर्वजों के सद्गुणों पर गर्व जो करती नहीं,वह जाति जीवित जातियों में रह नहीं सकती कहीं। कार्यक्रम में डॉ आशुतोष गुप्ता, डॉ शैलेन्द्र जैन, डॉ मुनेन्द्र सिंह चन्द्रावरिया, डॉ सुधीर पालीवाल, रामलाल कुशवाह, अच्युतम केशवम, संजय सिंह, दिनेश प्रताप सिंह चौहान, मुकुल नारायण जौहरी आदि ने उनके साहित्यिक तथा शैक्षणिक योगदान से जुड़े संस्मरण भी साझा किए। इस अवसर पर वेदान्त आमौरिया, ट्विशी आमौरिया, प्रशस्ति, वीरपाल सिंह,श्रीकृष्ण यादव, डॉ उमेश यादव,अनिल उपाध्याय, अभय मिश्रा आदि उपस्थित रहे।

रिपोर्टर : लखन यादव 

 

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