कलम का सिपाही एक पत्रकार की कहानी

एटा - सुबह की पहली किरण के साथ ही उसकी यात्रा शुरू हो जाती है। हाथ में स्मार्ट फोन,कंधे पर कैमरा और दिल में सच को सामने लाने का जुनून। वह न किसी महल का दरबारी है, न किसी सत्ता का गुणगान करने वाला। उसका धर्म केवल सत्य है और उसका कर्म केवल जनसेवा। जब किसान खेत में पसीना बहाता है, तो उसकी पीड़ा को शब्द देने वाला वही होता है। जब किसी गरीब की आवाज़ प्रशासन तक नहीं पहुंच पाती, तो उसकी आवाज़ बनकर खड़ा होने वाला भी वही होता है। जब अन्याय के अंधेरे में समाज घिरने लगता है, तब उसकी कलम एक मशाल बनकर रास्ता दिखाती है। जलेसर और एटा की गलियों से लेकर गांवों की चौपालों तक,उसने अनगिनत कहानियां देखी हैं। कहीं विकास की नई उम्मीदें हैं,तो कहीं समस्याओं का अंबार। कहीं मेहनतकश हाथों की सफलता है,तो कहीं संघर्षों की दास्तान। वह हर चेहरे के पीछे छिपी कहानी को पहचानता है,और उसे दुनिया के सामने लाने का प्रयास करता है। पत्रकार होना केवल समाचार लिखना नहीं है। यह जिम्मेदारी है,विश्वास है और समाज के प्रति एक कर्तव्य है। एक सच्चा पत्रकार कभी बिकता नहीं, झुकता नहीं और डरता नहीं। वह केवल सच के साथ खड़ा रहता है, चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों। कलम की ताकत तलवार से अधिक होती है,क्योंकि तलवार केवल शरीर को घायल करती है,जबकि कलम समाज की सोच को बदलने का सामर्थ्य रखती है। यही कारण है कि एक पत्रकार की पहचान उसकी निष्पक्षता,साहस और ईमानदारी से होती है। मैं पत्रकार हूं,शब्दों का सौदागर नहीं,जनता की आवाज़ हूं,किसी दरबार का प्रचारक नहीं। मेरी कलम का हर शब्द जनहित के नाम है,सच लिखना ही मेरा धर्म,और जनसेवा मेरा काम है।

 लखन यादव

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