ई-रजिस्ट्री के विरोध में अधिवक्ताओं का धरना छठवें दिन भी जारी, सरकार को रोज लाखों का राजस्व नुकसान

जलेसर : प्रदेश सरकार द्वारा रजिस्ट्री प्रक्रिया को निजी हाथों में सौंपने और ‘ग्राम निबंध मित्र’ बनाकर गांव स्तर से ही रजिस्ट्री करने के आदेश के खिलाफ अधिवक्ताओं का आंदोलन लगातार छठवें दिन भी जारी रहा। तहसील अधिवक्ता संघ, जलेसर के बैनर तले अधिवक्ता तहसील परिसर में धरने पर बैठे और सरकार से तानाशाही आदेश वापस लेने की मांग दोहराई।  

प्रदेश सरकार ने हाल ही में एक आदेश जारी कर रजिस्ट्री कार्य को निजीकरण की तरफ बढ़ाते हुए ग्रामीण स्तर पर ‘ग्राम निबंध मित्र’ की नियुक्ति का प्रावधान किया है। सरकार का तर्क है कि इससे आम जनता को तहसील के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और गांव से ही रजिस्ट्री संभव हो सकेगी। लेकिन अधिवक्ता संघ का मानना है कि इस व्यवस्था से रजिस्ट्री प्रक्रिया की पारदर्शिता और कानूनी जांच प्रभावित होगी। अधिवक्ताओं का कहना है कि दस्तावेजों की कानूनी जांच, सत्यापन और पक्षकारों को सही कानूनी सलाह देने का काम केवल अधिवक्ता ही कर सकते हैं। निजी व्यक्तियों को यह जिम्मेदारी देने से फर्जीवाड़ा, विवाद और मुकदमेबाजी बढ़ने का खतरा है।  
तहसील अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रामेश्वर सिंह यादव और सचिव डीएस यादव ने धरना स्थल पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि प्रदेश की सरकार अधिवक्ताओं की आवाज सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गूंगी-बहरी बनी हुई है और अधिवक्ता समाज के हितों पर कुठाराघात कर रही है। एकतरफा तानाशाही आदेश पारित कर प्रदेश की जनता के सामने नई समस्या खड़ी कर दी गई है। इस आदेश से न केवल अधिवक्ताओं की रोजी-रोटी पर संकट आया है, बल्कि आम जनता भी भ्रम और परेशानी की स्थिति में है।  
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार अपना यह आदेश वापस नहीं लेती। रजिस्ट्री कार्य पूरी तरह ठप होने के कारण प्रदेश सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व की हानि उठानी पड़ रही है। स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क के रूप में आने वाली आय रुक गई है, लेकिन इसके बावजूद सरकार वार्ता या समाधान की दिशा में कोई पहल नहीं कर रही है। अधिवक्ता संघ का कहना है कि सरकार को राजस्व का नुकसान तो दिखाई दे रहा है, लेकिन अधिवक्ताओं और जनता की समस्या दिखाई नहीं दे रही।  
धरना स्थल पर मौजूद अधिवक्ताओं ने नारेबाजी करते हुए सरकार विरोधी नारे लगाए और काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। अधिवक्ताओं का कहना है कि रजिस्ट्री केवल राजस्व वसूली का साधन नहीं है, बल्कि यह संपत्ति के अधिकारों की कानूनी सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इस काम को बिना कानूनी जानकारी वाले व्यक्तियों के हाथ में देना भविष्य में भूमि विवादों को बढ़ावा देगा।  
शनिवार को धरने में बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल हुए। इनमें अध्यक्ष रामेश्वर सिंह यादव, सचिव डीएस यादव, पूर्व अध्यक्ष रामनिवास यादव के अलावा रमेश पाल सिंह, केपी सिंह यादव, पुरुषोत्तम सिंह यादव, सुनील यादव, कमलेश सारस्वत, प्रमोद कुमार राठी, नरेंद्र यादव, देवेंद्र बघेल, जय शंकर गोड, संतोष यादव, सुनील दीक्षित, सुबोध जैन, शाहनवाज खान, एदल सिंह बघेल आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे। सभी अधिवक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जब तक आदेश वापस नहीं होगा, आंदोलन और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर प्रदेश स्तर पर एकजुट होकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

रिपोर्टर : लखन यादव

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