कुंजलपुर में गाटा संख्या 251 को लेकर विवाद
एटा - मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में फरियाद पहुंचने और संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश मिलने के बावजूद जलेसर क्षेत्र के ग्राम कुंजलपुर में चकरोड पर कथित अतिक्रमण का विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गाटा संख्या 251 स्थित चकरोड पर कब्जे के कारण आरसीसी सड़क निर्माण पूरी तरह ठप पड़ा है,जबकि कई स्तरों पर शिकायतों के बाद भी प्रशासनिक कार्रवाई जमीन पर दिखाई नहीं दे रही। गांव निवासी जितेंद्र कुमार और ओमवीर सिंह का कहना है कि चकरोड पर हुए कथित कब्जे की शिकायत उन्होंने पहले स्थानीय प्रशासन से की। कार्रवाई न होने पर मुख्यमंत्री पोर्टल (आईजीआरएस) पर कई बार शिकायत दर्ज कराई,लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। अंततः मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दर्शन तक पहुंचाया गया, जहां संबंधित अधिकारियों को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके बावजूद आज तक चकरोड से अतिक्रमण नहीं हटाया गया और सड़क निर्माण शुरू नहीं हो सका। पीड़ितों का आरोप है कि सरकारी योजनाओं और मुख्यमंत्री के निर्देशों को स्थानीय स्तर पर गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। उनका कहना है कि यदि जनता दर्शन में पहुंची शिकायतों का भी समयबद्ध निस्तारण नहीं होगा, तो आम लोगों का व्यवस्था पर भरोसा कैसे कायम रहेगा। ग्रामीणों के अनुसार,गाटा संख्या 251 गांव का सार्वजनिक चकरोड है, जिस पर कथित कब्जे के कारण आवागमन प्रभावित हो रहा है। सबसे अधिक परेशानी किसानों और ग्रामीणों को हो रही है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। वहीं, इसी मार्ग पर प्रस्तावित आरसीसी सड़क का निर्माण विवाद के चलते अधर में लटका हुआ है। जितेंद्र कुमार और ओमवीर सिंह का कहना है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौके पर प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय केवल कागजी प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कुछ अधिकारी और कर्मचारी अपनी निष्क्रियता से शासन की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं और सरकार की छवि धूमिल कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते चकरोड की पैमाइश कराकर अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो विकास कार्य लंबे समय तक बाधित रहेंगे। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व विभाग की मौजूदगी में निष्पक्ष पैमाइश कराकर यदि कब्जा पाया जाए तो तत्काल हटाया जाए और आरसीसी सड़क निर्माण शुरू कराया जाए। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि शासन गांवों में सड़क, संपर्क मार्ग और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन यदि सार्वजनिक रास्तों पर कब्जे नहीं हटाए जाएंगे तो विकास योजनाओं का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शिकायत की जांच नियमानुसार कराई जा रही है। यदि जांच में चकरोड पर अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो राजस्व अभिलेखों के अनुसार विधिक कार्रवाई करते हुए कब्जा हटाया जाएगा और विकास कार्य में आने वाली बाधा दूर की जाएगी।
रिपोर्टर - लखन यादव
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