सगे भाइयों ने शिक्षामित्र पिता के संघर्ष से लिखी सफलता की इबादत
एटा - अवागढ़ क्षेत्र में दो सगे भाइयों ने अपने शिक्षामित्र पिता के सपनों को कड़ी मेहनत से साकार कर दिखाया। आर्थिक परिस्थिति भले ही अनुकूल नहीं थी लेकिन माता-पिता के संघर्ष और मेहनत को अपनी सफलता से सार्थक कर दिया। जेष्ठ पुत्र ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की है, वहीं छोटे बेटे का भी आईआईटी दिल्ली के लिए चयन हो गया। अवागढ़ के यादव नगर निवासी रामनरेश यादव समीप स्थित गांव थरौआ के प्राइमरी स्कूल में शिक्षामित्र है। पिछले दिनों सिर्फ 10000 की पगार के बावजूद दोनों बेटों के उज्जवल भविष्य का सपना देखा और उनकी शिक्षा की जरूरत को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत और संघर्ष किया। बच्चों की पढ़ाई के लिए सिर्फ शिक्षामित्र की नौकरी काफी नहीं थी इसलिए पत्नी रेखा देवी के सहयोग से पशुपालन कर दुग्ध व्यवसाय से कुछ आर्थिक राहत पाने का भी प्रयास करते रहे। संघर्ष बच्चों की सफलता को लेकर पिछले कई वर्षों से चल रहा था। कड़ी मेहनत के बावजूद भी भले ही बेटों के लिए अन्य बच्चों की तरह आधुनिक पढ़ाई के संसाधन और महंगी कोचिंग उपलब्ध नहीं कर पाए लेकिन दोनों बेटों ने सीमित संसाधनों में भी एक साथ अपनी सफलता से उनके सपनों को साकार कर दिया।
हाल ही में जारी नीट परीक्षा परिणाम में बड़े बेटे अनुभव यादव ने 7516वीं ऑल इंडिया रैंक पाई है वही ओबीसी वर्ग में 3238 रैंक के साथ उत्कृष्ट स्थान पर रहे हैं। छोटे बेटे सभ्य यादव ने भी पिछले महीने आईआईटी में 9708 रैंक पाई और उनका चयन दिल्ली आईआईटी के लिए हुआ है। पढ़ाई में दोनों भाई शुरू से ही मेधावी रहे। कस्बा के ही अवागढ़ पब्लिक स्कूल से उन्होंने माध्यमिक शिक्षा पूरी की। दोनों ने घर पर रहकर ही किताबें और ऑनलाइन संसाधनों से तैयारी की। भले ही उन्हें विपरीत परिस्थितियों में महंगी कोचिंग और संसाधन सुलभ नहीं हुए लेकिन माता-पिता के त्याग को अपनी सफलता से फलीभूत कर दिखाया। अनुभव ने तीसरे प्रयास तथा सभ्य ने दूसरे प्रयास में सफलता पाई है। सभ्य पिछले साल एनडीए की भी परीक्षा पास कर चुके लेकिन उनका लक्ष्य आईआईटी का रहा। दोनों बेटों की सफलता की जानकारी के बाद उनके गांव थरौआ तथा अवागढ़ में खुशी का माहौल है। लोग बेटों की मेहनत के साथ-साथ पिता के संघर्ष की भी प्रशंसा करते नहीं थक रहे। बधाइयां देने वालों का तांता लगा है। शिक्षक चंद्रकांत यादव, जिला पंचायत सदस्य राकेश यादव, दिनेश यादव,मनोज यादव, सतीश चंद्र, ओमकार, ऋषिपाल सिंह, उर्वेश फौजी आदि ने भी खुशी जताते हुए होनहार भाइयों का स्वागत किया।
खुद शिक्षक न बन सके पर बच्चों को बनाया कामयाब
शिक्षामित्र रामनरेश ने खुद भी शिक्षामित्र से शिक्षक बनने के लिए कड़ी मेहनत की थी। बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बना सके इसके लिए खुद भी पढ़ाई की तथा टेट परीक्षा पास कर ली लेकिन सुपर टेट उत्तीर्ण न कर पाने की कसक रही। इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी और बच्चों को कामयाब बना कर दिखा दिया।
रिपोर्टर - लखन यादव
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