नेमीचंद्र ने 'विमल' बना दी कोसमा की धरा आचार्य विमल सागर की जयंती पर विशेष
एटा - बाल्यकाल में अपनी अठखेलियों से हंसाने तथा शरारतों से परेशान करने वाले नेमीचंद्र की ईश्वर से ऐसी लौ लगी तो जलेसर क्षेत्र के कोसमा गांव का वही छोटा बच्चा विश्वभर में धर्म पताका फहराने वाले आचार्य विमल सागर के नाम से विश्व विख्यात हुआ।
गांव तखावन से कोसमा में आकर बसे एक मात्र जैन परिवार बिहारीलाल व कटोरीबाई के इकलौते पुत्र नेमीचंद्र के विश्वभर में आज लाखों शिष्य हैं।वर्ष 1915 में आश्विन कृष्ण सप्तमी को नेमीचंद्र का जन्म कोसमा हुआ। गांव के नेमियां से सुधर्म सागर व विमल सागर तक का नेमीचंद्र का सफर सुगम नहीं था। हिंदी,संस्कृत व शास्त्री शिक्षा पाने के बाद दिल्ली की एक प्रेस में कार्य करते-करते जब नेमीचंद्र का मन नहीं लगा तो आगरा के राजा की मंडी में एक विद्यालय में अध्यापन कार्य किया। किंतु ईश्वर की लौ ने उनका मन वहां नहीं लगने दिया। वह 108 चंद्र सागर जी महाराज के सानिध्य में पहुंचे जहां उन्होंने शूद्र जल का त्याग किया। तदुपरांत जयपुर के विद्यालय में अध्यापन किया। मुनियों के संग के चलते उनकी शिकायत पिता बिहारीलाल से हुई कि इकलौता पुत्र मुनि बन जायेगा।चिंतित पिता नेमीचंद्र को गांव ले आये तथा कपड़े का व्यवसाय करा दिया। उनका मन तो समाजसेवा में था। नेमीचंद्र ने गांव में ही शिक्षा का अलख जलाने की ठान ली तथा उन्होंने गांव की चौपाल में बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया वहीं सांयकाल वृद्धों को भी ककहरा सिखाने लगे। छात्रों से शिक्षण शुल्क में वे रात्रि भोजन का त्याग व जल छानकर पीने का संकल्प दिलाते थे।
शिखर जी जाते समय हुआ वैराग्य
नेमीचंद्र को वैराग्य शिखर जी जाते समय हुआ। वे साइकिल से शिखर जी के लिए निकले, रास्ते में जंगल में उनकी साइकिल पंक्चर हो गई। वे साइकिल को पैदल ही ले जा रहे थे, रास्ते में उन्हें एक वृद्ध मिला उसने कहा साइकिल क्यों घसीट रहे हो पंक्चर वाला तो थोड़ा पीछे ही रह गया। वे लौटे तो आश्चर्य में थे थोड़ी देर पहले तो पंक्चर वाला नहीं था। पंक्चर सही करा नेमीचंद्र ने जब पैसे दिये तो उसने लेने से इंकार कर दिया। वह आगे बढ़े पर उनका मन न माना वे पैसे देने वापस उस स्थान पर आये तो वहां कोई दुकान नहीं थी। उन्हें वहीं से वैराग्य हुआ। जैन संत बनकर आचार्य पद सुशोभित करते हुए विश्व में जैन धर्म की पताका फहराई। जलेसर का कोसमां गांव अब तीर्थ बन चुका है जहां चिकित्सालय सहित तमाम सेवा कार्य उनके शिष्यों द्वारा किए जा रहे हैं।
रिपोर्टर : लखन यादव

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