टूटी उम्मीदों को मिलाया, उजड़ता आशियाना बचाया इटावा पुलिस बनी मसीहा, तो आंसुओं के बीच पति-पत्नी ने गले मिलकर लिखा प्यार का नया परवाना!

इटावा - टूटे हुए रिश्तों की बिखरी हुई डोर को इटावा की खाकी ने एक बार फिर मोहब्बत और समझदारी की सूई से पिरो दिया है! एक तरफ जहां आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में छोटी-छोटी बातों को लेकर आई दरारें हंसते-खेलते परिवारों को पूरी तरह तबाह कर देती हैं, वहीं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री बृजेश कुमार श्रीवास्तव के कुशल निर्देशन में महिला थाना पुलिस ने संवेदनशीलता की एक ऐसी अनूठी मिसाल पेश की है जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। मामला तब गंभीर हो गया जब एक आहत पत्नी अपनी आंखों में आंसू और दिल में शिकायतों का अंबार लेकर सीधे महिला थाने की दहलीज पर पहुंची। आरोप था कि जिस जीवनसाथी के साथ सात फेरे लिए थे, उसी ने मारपीट और गाली-गलौज कर उसका संसार उजाड़ दिया। लेकिन, एसएसपी इटावा बृजेश कुमार श्रीवास्तव के सख्त निर्देशों के बीच जब महिला थाना पुलिस का मानवीय चेहरा सामने आया, तो तस्वीर ही बदल गई। पुलिस ने महकमे की किसी ठंडी कानूनी प्रक्रिया के बजाय एक सच्चे हमदर्द की भूमिका निभाई। पति और पत्नी दोनों को महिला थाने पर बुलाकर आमने-सामने बैठाया गया और जब दिलों की दूरियों को पाटने वाली खुली बातचीत शुरू हुई, तो नफरत और गुस्से की दीवारें धीरे-धीरे पिघलने लगीं।

महिला थाना पुलिस की इस सूझबूझ और प्यार भरी समझाइश ने चमत्कार कर दिखाया। गिले-शिकवे आंसुओं में बह गए और सात जन्मों का वह पवित्र रिश्ता एक बार फिर से नई उम्मीदों के साथ खिल उठा। दोनों पक्षों की सहमति से आपसी समझौता कराया गया और दोनों ने पुरानी कड़वाहटों को हमेशा के लिए दरकिनार कर भविष्य में आपसी सौहार्द और शांतिपूर्ण तरीके से रहने का प्यारा परवाना लिख दिया। इटावा पुलिस ने आज सिर्फ एक घर ही नहीं बचाया, बल्कि विश्वास की उस डोर को फिर से मजबूत कर दिया जो इंसानियत की सबसे बड़ी जीत है। यह वाकया हमें यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि नफरत की आग से जलते हुए आशियानों को अगर थोड़ा सा अपनापन और संवाद मिल जाए, तो हर घर फिर से स्वर्ग बन सकता है।

रिपोर्टर - देवेन्द्र सिंह

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