अनपढ़ मां का कमाल,देश सेवा को दिए चारों लाल

एटा - अपने जीवन में कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा, ऐसी परिस्थितियां रही की खुद शिक्षा से वंचित नहीं लेकिन अपने चार बेटों को ऐसी परवरिश दी कि उन्हें देश की सेवा के लिए तैयार किया और समर्पित कर दिया। चार बेटों में बड़े तीन बेटे भारतीय सेवा में सरहद की रक्षा और देश सेवा के कार्यों में जीवन को समर्पित करते हुए जन्म देने वाली मां का गर्वित कर रहे हैं। वही सबसे छोटे पुत्र ने विकलांगता के बावजूद भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एथलेटिक्स में अपने प्रदर्शन से भारत देश को गौरवान्वित किया है। 

अनपढ़ होने के बावजूद भी अपने लालों को देश प्रेम का पाठ पढ़कर भारत मां की सेवा में समर्पित करने वाली मां जैथरा क्षेत्र के ग्राम भलौल निवासी 60 वर्षीय सर्वेशा देवी हैं। ग्रामीण परिवेश में पलने बढ़ने के साथ बचपन से ही खुद कलम किताब से डर रही। कृषक जुगेंद्र सिंह से विवाह के उपरांत सामाजिक बदलाव को देखते हुए लगा कि महिलाओं के लिए भी शिक्षा जरूरी है। निश्चित किया कि बच्चों को शिक्षित तो बनाना ही है बल्कि उन्हें देश की सेवा के लिए तैयार करना है।घर में चार पुत्रों की खुशियां आई। उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ सभी पुत्रों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए बचपन से ही उचित खान-पान तथा उन्हें सेवा में भेजने के लिए प्रैक्टिस पर जोर दिया।सर्वेशा देवी के सपने साकार होते भी दिखाई देने लगे जब सबसे बड़े पुत्र प्रशांत यादव भारतीय सेवा में नियुक्त हुए। फिलहाल वह चीन बॉर्डर पर देश सेवा में लगे हैं। दूसरे पुत्र सुमित यादव ने भी सेना में नियुक्ति पाई, इन दोनों पठानकोट में पाकिस्तान की सेना को मुंहतोड़ जवाब देकर अपनी माता को गर्वित कर रहे हैं। तीसरे पुत्र मोहन यादव भी जबलपुर में सेना मुख्यालय पर कार्यरत देश सेवा में संलग्न है। सबसे छोटे पुत्र पुष्पेंद्र यादव किसी पहचान की मोहताज नहीं है। एशियाई पैरा ओलंपिक गेम्स में भारत को कांस्य पदक दिलाने की सफलता के साथ देश को एथलेटिक्स के क्षेत्र में आधा दर्जन गोल्ड मेडल दिला चुके हैं। भारत देश का मान बढ़ाने के साथ वह आयकर विभाग में असिस्टेंट आयकर अधिकारी के रूप में मुंबई में तैनात है। पुष्पेंद्र बताते हैं कि 4 साल की उम्र में बीमारी से जीवन बचा और उन्हें पोलियो की त्रासदी से जूझना पड़ा। वह मां की परवरिश और मेहनत ही थी जो की नया जीवन दोबारा पाकर देश के लिए खेल के क्षेत्र में कुछ कर दिखाने का अवसर मिला और कर दिखाया। मां सर्वेशा देवी कहती है वह पढ़ी-लिखी नहीं फिर भी उन्हें इस बात की खुशी है कि उनके चार बेटे और चारों ही भारत माता की सेवा में लगे हैं। एक मां को इससे ज्यादा खुशी की और कोई नहीं हो सकती।

रिपोर्टर - लखन यादव

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