जहाँ मानव की शक्ति समाप्त, वहाँ से शुरू होती भागवत कृपा- डॉ विनीतानंद

एटा : अवागढ़- क्षेत्र के गांव मीसाखुर्द स्थित मीशेश्वर धाम में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन भगवताचार्य डॉ विनीतानंद जी महाराज ने पावन कथा में द्रौपदी चीरहरण का मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए भक्त और भगवान के अटूट सम्बन्ध का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया।
कथा व्यास ने कहा कि जब द्वापर काल में कौरवों और पांडवों की सभा में सभी महान योद्धा मौन थे। कोई भी देवी द्रौपदी की सहायता नहीं कर पा रहा था। तब देवी द्रौपदी ने अपने आराध्य भगवान  श्रीकृष्ण को पुकारा। भगवताचार्य ने बताया कि जब संसार में मनुष्य के सभी सहारे छूट जाते है तो वह सिर्फ प्रभु का ही आश्रय लेता है। सच्चे मन और अटूट विश्वास के आफसाथ प्रार्थना करने पर भगवान अपने भक्त की लाज स्वयं रखते हैं। डॉ विनीतानंद महाराज कहते हैं कि द्वापर काल में घटित इस घटना का
यह प्रसंग हमें सिखाता है कि संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो लेकिन सच्ची श्रद्धा, अटूट विश्वास और पूर्ण समर्पण से की गई पुकार पर भगवान अपने भक्त की रक्षा अवश्य करते हैं। जहाँ मानव की शक्ति समाप्त होती है, वहाँ से भगवान की कृपा प्रारम्भ होती है।
भगवताचार्य के इस प्रसंग के दौरान समूचा कथा पंडाल भक्तिमय हो गया। भक्त और भगवान के प्रसंग के दौरान पांडाल में उपस्थित सैंकड़ों भक्तगण इतने लीन हो गए कि वे टस से मस नहीं हुए।
इस दौरान परीक्षित कमल कुमार व मधुवाला देवी के अलावा संजू शर्मा, सुबोध कुमार सिंह, रवेंद्र पाल सिंह, प्रवीण कुमार,अशोक कुमार आदि सैंकड़ों भक्तगण मौजूद रहे।

रिपोर्टर : लखन यादव

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