मातृशक्ति ही परिवार और राष्ट्र निर्माण की मजबूत आधारशिला : रेनू गौड़

एटा :  सरस्वती विद्या मंदिर में शिक्षक-अभिभावक गोष्ठी के साथ मातृ भारती सम्मेलन आयोजित सरस्वती विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रांगण में शिक्षक-अभिभावक गोष्ठी एवं मातृ भारती सम्मेलन का आयोजन किया गया। गोष्ठी में शिक्षकों और अभिभावकों ने विद्यार्थियों के शैक्षिक एवं चारित्रिक विकास को लेकर संवाद किया। विद्यार्थियों ने ‘कबाड़ से जुगाड़’ थीम पर गणित एवं विज्ञान से संबंधित आकर्षक नवाचार और मॉडल प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्ष विमलेश माहेश्वरी, विशिष्ट अतिथि राज्य महिला आयोग उत्तर प्रदेश की सदस्य रेनू गौड़, राजकीय मेडिकल कॉलेज की चिकित्सक डॉ. अर्चना यादव, वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक जागृति चतुर्वेदी, चाइल्ड हेल्पलाइन प्रभारी ज्योति शर्मा, जिला पंचायत सदस्य रजनी गौतम, रेनू गोयल, अलका सक्सेना, सुनीता राठी आदि ने भारत माता एवं मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में ‘हम ही मातृशक्ति हैं’ प्रस्तुति के साथ ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ विषय पर लघु नाटिका प्रस्तुत की गई। इसके अलावा पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिता, भारतीय संस्कृति पर आधारित प्रश्नोत्तरी एवं भजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए आगे बढ़ने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया गया। संघर्ष की कहानी ने किया भावुक कार्यक्रम में विमलेश ने अपने संघर्ष और जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कम उम्र में पति के निधन के बाद उन्होंने साहस और आत्मनिर्भरता के साथ अपने चार बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी संभाली। बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई और अच्छे संस्कार दिए। उनके चारों बच्चे उच्च पदों पर कार्यरत हैं। उनकी संघर्षपूर्ण कहानी ने उपस्थित महिलाओं को प्रेरित किया।

मां बच्चे की पहली गुरु : रेनू गौड़ राज्य महिला आयोग की सदस्य रेनू गौड़ ने कहा कि किसी भी सशक्त और संस्कारित राष्ट्र की नींव परिवार और विशेष रूप से मातृशक्ति से मजबूत होती है। भारतीय संस्कारों में मां को केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि बच्चे की प्रथम गुरु माना गया है। बच्चा व्यवहार, अनुशासन, सत्य, सम्मान और कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखना सबसे पहले मां से सीखता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के दौर में माताओं की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। मां को यह देखने की जरूरत है कि बच्चा क्या पढ़ रहा है, क्या देख रहा है और उसके व्यक्तित्व में किस तरह के संस्कार विकसित हो रहे हैं। बच्चों को तकनीक से दूर करने के बजाय उसका सदुपयोग और डिजिटल अनुशासन सिखाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल बड़ी योजनाओं से नहीं, बल्कि परिवारों में ईमानदार, अनुशासित, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करने से होता है। सभी माताओं को संकल्प लेना चाहिए कि वे अपने बच्चों को केवल सफल व्यक्ति नहीं, बल्कि अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाएंगी।
पौष्टिक भोजन को दें प्राथमिकता : डॉ. अर्चना यादव राजकीय मेडिकल कॉलेज की डॉ. अर्चना यादव ने कहा कि माताओं को अपने खान-पान में बदलाव करने की जरूरत है। आज बच्चे जंक फूड की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। उन्हें पौष्टिक एवं स्वास्थ्यवर्धक भोजन के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि घर की नारी स्वस्थ रहेगी तभी पूरा परिवार स्वस्थ और व्यवस्थित रह सकेगा। वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक जागृति चतुर्वेदी ने महिलाओं को मोबाइल फोन का उचित एवं सुरक्षित उपयोग करने तथा आकस्मिक परिस्थितियों में मदद के लिए उपलब्ध हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी दी। महिलाओं ने प्रस्तुत किए भजन और पारंपरिक वेशभूषा में रैंप वॉक
कार्यक्रम में अभिभावक माताओं ने भजनों की प्रस्तुति दी। गरिमा, विप्रांशु, सुमन, वंदना पाठक, पूजा शर्मा, मीनू, सुमन वर्मा और वीरा ने प्रस्तुतियां दीं। भजन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान शालिनी, द्वितीय स्थान सुमन-कुमुदिया तथा तृतीय स्थान विलोचना और ज्योति ने संयुक्त रूप से प्राप्त किया।
इसके अलावा माताओं ने पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में रैंप वॉक कर भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन हुआ। विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
राजनीति में भी महिलाएं निभा रहीं महत्वपूर्ण भूमिका : रजनी गौतम जिला पंचायत सदस्य रजनी गौतम ने कहा कि महिलाओं को अनेक सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, फिर भी उन्हें धैर्य और साहस के साथ आगे बढ़ना चाहिए। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर लोकतांत्रिक भारत तक महिलाओं ने अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी केवल संख्या बढ़ाने का विषय नहीं, बल्कि समावेशी और संवेदनशील लोकतंत्र की आवश्यकता है। महिलाओं के नेतृत्व से शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, बालिका विकास और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को अधिक प्रभावी आवाज मिलती है।
इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक शिखा सक्सेना सहित गार्गी उपाध्याय, अंजू शर्मा, सुमन वार्ष्णेय, कामिनी राठी, कुसुम पांडे, संयोगिता भारद्वाज, स्वाती भारद्वाज, श्वेता जैन, पूनम राजपूत, निधि पांडे, अलका सक्सेना, अंजू वार्ष्णेय, सोनिया माहेश्वरी, ममता उपाध्याय, सोनिका उपाध्याय, शालिनी यादव, आशु कश्यप, रुचि यादव, नितेश सिंह, सीता शर्मा समेत सैकड़ों महिलाएं मौजूद रहीं। विद्यालय के शैक्षिक प्रमुख प्रेमचंद, उप प्रधानाचार्य संजीव कुमार मिश्रा, वरिष्ठ आचार्य डॉ. अरुण राजोरिया, रमन प्रताप सिंह, आलोक त्रिवेदी, भवनाथ झा, राहुल चौहान, पवन कुमार, केपी सिंह, सुखबीर सिंह, विनय प्रताप सिंह, शैलेश प्रताप सिंह, मनोज सिंह, डॉ. संजीव सिंह, वीरेश कुमार, श्रद्धेश उपाध्याय, क्षेत्रपाल सिंह, कृष्णकांत पांडे आदि उपस्थित रहे।

रिपोर्टर : लखन यादव

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