आधी रात को फरिश्ता बनी जसवंतनगर पुलिस

आधी रात को फरिश्ता बनी जसवंतनगर पुलिस: सुनसान सड़क पर खड़ी बेबस माँ को सुरक्षित घर पहुँचाकर जीता जनता का दिल

इटावा-सड़कों पर जब सन्नाटा पसरा था और वक्त की सुई आधी रात का पहरा दे रही थी, तब मानवता की एक ऐसी कहानी लिखी गई जिसने खाकी का मस्तक गर्व से ऊँचा कर दिया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव के कुशल निर्देशन में गश्त कर रही थाना जसवंतनगर पुलिस के लिए 02 मई की रात महज एक ड्यूटी नहीं, बल्कि एक परीक्षा थी जिसमें वे 'इंसानियत' के नंबरों से अव्वल आए। मामला छिमरा रोड का है, जहाँ करीब 70 साल की बुजुर्ग सुमित्रा देवी अंधेरे में अकेली खड़ी किसी वाहन की राह देख रही थीं। घर जाने की जल्दी और रात का खौफ उनकी आँखों में साफ दिख रहा था, लेकिन जसवंतनगर पुलिस की टीम ने जैसे ही उन्हें इस हालत में देखा, तत्काल अपनी गाड़ी रोककर उनके पास जा पहुँची।
पुलिस ने जब वृद्ध महिला से बातचीत की तो पता चला कि उन्हें रायनगर जाना है और कोई साधन न मिलने के कारण वह असहाय महसूस कर रही थीं। यहाँ पुलिस ने पारंपरिक कठोरता को किनारे रख संवेदनशीलता का परिचय दिया और सरकारी वाहन को ही बुजुर्ग माँ की सवारी बना दिया। पुलिस की टीम ने उन्हें ससम्मान उनके घर रायनगर पहुँचाया, जहाँ पहुँचते ही परिवार के चेहरे पर जो राहत दिखी, वह किसी भी मेडल से बड़ी थी। इटावा पुलिस का यह मानवीय चेहरा आज पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह वाकया साफ संदेश देता है कि जनपद की पुलिस सिर्फ अपराध रोकने के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के दुख-सुख में ढाल बनकर खड़े होने के लिए भी चौबीसों घंटे तैनात है। वाकई, सेवा और सुरक्षा का जो संकल्प इटावा पुलिस ने लिया है, उसे जसवंतनगर पुलिस ने पूरी शिद्दत से निभाकर जनता के भरोसे को और मजबूत कर दिया है।

रिपोर्टर देवेन्द्र सिंह

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