धरती मां को जहर से बचाने के लिए इटावा के किसानों का महाशंखनाद
इटावा - बसरेहर ब्लॉक का छोटा सा गांव नगला मांधाता जो आज एक ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बन गया, जहां रासायनिक खादों के खिलाफ किसानों ने एक बहुत बड़ा अभियान छेड़ दिया है। खेतों को बंजर होने से बचाने और इंसानी जिंदगी में घुल रहे जहर को उखाड़ फेंकने के लिए इस गांव में 'प्राकृतिक खेती जागरूकता अभियान' के तहत एक ऐसी अलख जगाई गई है जिसने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। इस पूरे महा-अभियान की कमान संभाली मास्टर ट्रेनर अरविंद प्रताप सिंह परिहार ने, जिन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी से किसानों के भीतर एक नया जोश फूंक दिया और उन्हें अपनी माटी की तरफ लौटने के लिए मजबूर कर दिया। सैकड़ों किसानों की भारी भीड़ के बीच आज सिर्फ खेती की बात नहीं हुई,बल्कि इंसानी सेहत, मिट्टी की जान और पर्यावरण को विनाश से बचाने का एक मुकम्मल रोडमैप तैयार किया गया। मास्टर ट्रेनर ने किसानों को सीधा और कड़ा संदेश दिया कि अगर अब भी हम नहीं संभले तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। उन्होंने गाय को सिर्फ एक पशु नहीं बल्कि खुशहाली का सबसे बड़ा जरिया बताते हुए गौ-संरक्षण का एक ऐसा अचूक फॉर्मूला दिया जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया। इस जबरदस्त चौपाल में किसानों को पारंपरिक तरीके छोड़कर पूरी तरह गौ-आधारित खेती अपनाने का संकल्प दिलाया गया। हर एक किसान उस वक्त हैरान रह गया जब उन्हें जीवामृत और घनजीवामृत जैसे चमत्कारी और जादुई जैविक खादों को तैयार करने की पूरी तकनीक समझाई गई। यह सिर्फ एक सरकारी जानकारी नहीं थी, बल्कि यह लागत को शून्य करने और मुनाफे को आसमान पर पहुंचाने का एक ऐसा गुप्त मंत्र था जिसे जानने के लिए किसान बरसों से तड़प रहे थे।
आज की इस महा-बैठक ने यह साफ कर दिया है कि नगला मांधाता के किसान अब अपनी फसलों में जहर नहीं डालेंगे। मृदा स्वास्थ्य को दुरुस्त करने, इंसानी शरीर को बीमारियों से मुक्त रखने और पर्यावरण को शुद्ध बनाने के इस त्रिकोणीय आंदोलन की गूंज अब पूरे जनपद में सुनाई दे रही है। अरविंद प्रताप सिंह परिहार की इस मुहिम ने किसानों की बंद आंखों को खोल दिया है और अब इटावा का हर खेत इस प्राकृतिक क्रांति की गवाही देने के लिए पूरी तरह तैयार खड़ा है।
रिपोर्टर - देवेन्द्र सिंह

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