पर्यावरण की खातिर सड़कों पर उतरी 'खाकी': इटावा पुलिस ने पैदल चलकर दिया 'सुरक्षित कल' का संदेश

इटावा : आज इटावा की सड़कों पर एक अद्भुत और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। आमतौर पर अपनी व्यस्ततम ड्यूटी और वाहनों के काफिले के साथ रहने वाली इटावा पुलिस आज आम नागरिकों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलती नजर आई। मौका था 'छात्र पर्यावरण संसद' द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाए जा रहे उस अनूठे अभियान का, जिसमें एक दिन अपने निजी वाहनों का त्याग कर पैदल कार्यालय आने का संकल्प लिया गया था।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री बृजेश कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में अपर पुलिस अधीक्षकगण, क्षेत्राधिकारी और पुलिस कार्यालय का पूरा अमला सुबह अपने आवास से पैदल ही कार्यालय की ओर निकल पड़ा। पुलिस के इस कदम ने न केवल शहर की सड़कों पर राहगीरों का ध्यान खींचा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक गंभीर और सकारात्मक संदेश भी दिया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने 'छात्र पर्यावरण संसद' के संयोजक डॉ. कैलाश चन्द्र और उनकी ऊर्जावान टीम के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण की चुनौतियों से जूझ रही है, तब युवाओं द्वारा छेड़ी गई यह मुहिम उम्मीद की किरण है। एसएसपी श्री बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था का पालन ही नहीं कराती, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी जानती है। आज हमारे पैदल चलने का उद्देश्य महज एक रस्म पूरी करना नहीं, बल्कि आम जनता को यह एहसास दिलाना है कि हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए एक स्वच्छ और हरा-भरा भविष्य छोड़ना हम सबकी साझी जिम्मेदारी है।
पुलिस की इस आत्मीय सहभागिता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इटावा पुलिस अब समाज के हर उस जागरूक प्रयास का हिस्सा बनने के लिए पूरी तरह तत्पर है, जो जनहित और पर्यावरण की बेहतरी से जुड़ा है। इस अभियान ने इटावा वासियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि यदि हम सब थोड़ा-थोड़ा सहयोग करें, तो धरती को बचाने का संकल्प महज कागजों तक सीमित न रहकर हकीकत में बदल सकता है। आज की यह पहल न केवल पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि पुलिस और जनता के बीच के मानवीय रिश्तों की एक नई इबारत भी लिखती है।

रिपोर्टर : देवेन्द्र सिंह

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