सपा-बसपा को पटखनी और भाजपा की लगातार धाक: एत्मादपुर में कैसे पलटा सियासी पासा?

उत्तर प्रदेश की सियासत में आज बात आगरा जिले की एत्मादपुर विधानसभा सीट की, जहां पिछले तीन चुनावों में जीत के समीकरण लगातार बदलते नजर आए। साल 2012 में बहुजन समाज पार्टी ने बाजी मारी, 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता का समीकरण बदल दिया और 2022 में भाजपा ने एक बार फिर जीत दर्ज करके सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। जी हां, एत्मादपुर की चुनावी कहानी दिलचस्प है। यहां साल 2012 में बसपा के डॉ. धर्मपाल सिंह ने समाजवादी पार्टी के डॉ. प्रेम सिंह बघेल को 8 हजार 504 वोटों से हराया था। लेकिन 2017 के चुनाव में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। भाजपा के राम प्रताप सिंह चौहान ने बसपा के डॉ. धर्मपाल सिंह को 47 हजार 255 वोटों के बड़े अंतर से मात दी। अब नजरें 2027 के विधानसभा चुनाव पर भी रहेंगी। क्या भाजपा लगातार तीसरी जीत दर्ज कर पाएगी? क्या बसपा अपनी पुरानी पकड़ दोबारा मजबूत कर पाएगी? और क्या समाजवादी पार्टी भी मुकाबले में अपनी स्थिति सुधार पाएगी? इन सवालों का जवाब जानने के लिए आइए, एत्मादपुर विधानसभा सीट के पिछले तीन चुनावों का पूरा हिसाब-किताब समझते हैं।

सबसे पहले बात करते हैं साल 2012 के विधानसभा चुनाव की। उस समय एत्मादपुर सीट पर बहुजन समाज पार्टी के डॉ. धर्मपाल सिंह ने जीत दर्ज की थी। उनके सामने समाजवादी पार्टी के डॉ. प्रेम सिंह बघेल मुख्य मुकाबले में थे। चुनाव के नतीजों में डॉ. धर्मपाल सिंह को 79 हजार 982 वोट मिले, जबकि सपा के डॉ. प्रेम सिंह बघेल को 71 हजार 478 वोट प्राप्त हुए। इस तरह बसपा के उम्मीदवार ने 8 हजार 504 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। लेकिन इस चुनाव में भाजपा भी मुकाबले से बाहर नहीं थी। भाजपा के राम प्रताप सिंह चौहान 50 हजार 98 वोट हासिल करके तीसरे स्थान पर रहे। वहीं राष्ट्रीय लोक दल के बाबा हरदेव सिंह को 20 हजार 750 वोट मिले। इन आंकड़ों से साफ होता है कि 2012 में एत्मादपुर में बसपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुख्य मुकाबला था, जबकि भाजपा तीसरे स्थान पर रही। डॉ. धर्मपाल सिंह ने जीत दर्ज करके विधानसभा में अपनी जगह बनाई। उस चुनाव में मतदान प्रतिशत लगभग 65.23 रहा। जीत का अंतर 8 हजार 504 वोट था। मुकाबला ऐसा था कि बसपा और सपा के बीच वोटों का अंतर बहुत बड़ा नहीं था। लेकिन अगले चुनाव में यही सीट एक बिल्कुल अलग राजनीतिक तस्वीर पेश करने वाली थी।

अब बात करते हैं साल 2017 के विधानसभा चुनाव की। इस चुनाव में एत्मादपुर की सियासत ने करवट ली और भाजपा के राम प्रताप सिंह चौहान ने जीत दर्ज की। राम प्रताप सिंह चौहान को कुल 1 लाख 37 हजार 381 वोट मिले। वहीं बसपा के डॉ. धर्मपाल सिंह को 90 हजार 126 वोट प्राप्त हुए। इस तरह भाजपा ने 47 हजार 255 वोटों के अंतर से जीत हासिल की।

जरा 2012 और 2017 के आंकड़ों की तुलना कीजिए। 2012 में भाजपा के राम प्रताप सिंह चौहान तीसरे स्थान पर थे, लेकिन 2017 में वही उम्मीदवार पहले स्थान पर पहुंच गए। दूसरी ओर, 2012 में जीतने वाले बसपा के डॉ. धर्मपाल सिंह इस बार दूसरे स्थान पर रहे। समाजवादी पार्टी की राजबेटी बघेल को 43 हजार 925 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहीं। इस चुनाव में भाजपा की जीत का अंतर 2012 के बसपा उम्मीदवार की जीत के अंतर से काफी बड़ा था। जहां 2012 में जीत का अंतर सिर्फ 8 हजार 504 वोट था, वहीं 2017 में यह बढ़कर 47 हजार 255 वोट हो गया। मतदान प्रतिशत भी बढ़ा। 2012 में जहां लगभग 65.23 प्रतिशत मतदान हुआ था, वहीं 2017 में यह करीब 68.13 प्रतिशत रहा। इस नतीजे के साथ एत्मादपुर विधानसभा सीट पर भाजपा ने पहली बार इस तीन चुनावों के सिलसिले में जीत दर्ज की और बसपा को पीछे छोड़ दिया। लेकिन 2017 के नतीजों के बाद एक और सवाल खड़ा हुआ क्या भाजपा अगले चुनाव में भी अपनी जीत बरकरार रख पाएगी? इसका जवाब 2022 के चुनाव में मिला।

अब आते हैं साल 2022 के विधानसभा चुनाव पर। इस बार भाजपा ने एत्मादपुर सीट पर अपना उम्मीदवार बदल दिया। पार्टी ने डॉ. धर्मपाल सिंह को टिकट दिया, जो 2017 में बसपा के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुके थे। यानी इस बार वही डॉ. धर्मपाल सिंह भाजपा के उम्मीदवार बनकर मैदान में उतरे, जिन्हें पिछले चुनाव में भाजपा के राम प्रताप सिंह चौहान ने हराया था। 2022 के चुनाव में डॉ. धर्मपाल सिंह को 1 लाख 46 हजार 603 वोट मिले। वहीं बहुजन समाज पार्टी के प्रवल प्रताप सिंह को 98 हजार 679 वोट प्राप्त हुए। डॉ. धर्मपाल सिंह ने 47 हजार 924 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। इस तरह भाजपा ने एत्मादपुर विधानसभा सीट पर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। यहां गौर करने वाली बात यह है कि भाजपा ने 2017 के मुकाबले उम्मीदवार बदल दिया, लेकिन सीट पर जीत का सिलसिला नहीं टूटा। 2017 में राम प्रताप सिंह चौहान को 1 लाख 37 हजार 381 वोट मिले थे, जबकि 2022 में भाजपा के डॉ. धर्मपाल सिंह को 1 लाख 46 हजार 603 वोट मिले। यानी भाजपा के उम्मीदवार को पिछले चुनाव के मुकाबले 9 हजार 222 वोट ज्यादा प्राप्त हुए। वहीं जीत का अंतर भी 2017 के 47 हजार 255 वोट से बढ़कर 2022 में 47 हजार 924 वोट हो गया। यानी जीत के अंतर में 669 वोट की बढ़ोतरी हुई। मतदान प्रतिशत की बात करें तो 2022 में यह लगभग 67.60 प्रतिशत रहा, जो 2017 के लगभग 68.13 प्रतिशत से थोड़ा कम था। इस तरह 2022 में भाजपा ने सीट बरकरार रखी और डॉ. धर्मपाल सिंह ने नए राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की।

अब सबसे बड़ा सवाल 2027 के विधानसभा चुनाव में एत्मादपुर की जनता किसे चुनेगी? क्या भाजपा अपनी जीत की हैट्रिक पूरी कर पाएगी? क्या बसपा अपनी खोई हुई सीट वापस पाने की कोशिश करेगी? क्या समाजवादी पार्टी फिर से मुख्य मुकाबले में जगह बना पाएगी? इन सवालों का जवाब फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। आने वाले चुनाव में स्थानीय विकास, सड़कें, पेयजल, जलभराव, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, रोजगार और क्षेत्र की दूसरी बुनियादी समस्याएं चर्चा का हिस्सा बन सकती हैं। मतदाता मौजूदा विधायक के कामकाज, अधूरे विकास कार्यों और स्थानीय जरूरतों के आधार पर भी अपना फैसला कर सकते हैं। वहीं राजनीतिक दलों की रणनीति और उम्मीदवारों का चयन भी अहम रहेगा। एत्मादपुर के पिछले चुनाव यह दिखाते हैं कि यहां जीतने वाली पार्टी और उम्मीदवार दोनों बदल चुके हैं। इसलिए पिछले नतीजों के आधार पर 2027 का परिणाम तय मान लेना सही नहीं होगा। मतदाताओं के सामने एक बार फिर विकल्प होंगे और अंतिम फैसला मतदान के जरिए ही सामने आएगा।

तो यह थी आगरा जिले की एत्मादपुर विधानसभा सीट की पूरी चुनावी कहानी। 2012 में बसपा के डॉ. धर्मपाल सिंह ने जीत दर्ज की। 2017 में भाजपा के राम प्रताप सिंह चौहान ने सीट पर कब्जा किया। फिर 2022 में भाजपा ने डॉ. धर्मपाल सिंह को उम्मीदवार बनाया और उन्होंने पार्टी को लगातार दूसरी जीत दिलाई। तीन चुनावों में दो अलग-अलग दलों के उम्मीदवार जीते, लेकिन 2017 और 2022 में भाजपा ने अपनी स्थिति बनाए रखी। अब 2027 में चुनावी समीकरण किस दिशा में जाएंगे, यह आने वाला वक्त बताएगा। क्या भाजपा जीत का सिलसिला जारी रख पाएगी? क्या बसपा वापसी करेगी? या फिर समाजवादी पार्टी मुकाबले को नया मोड़ देगी?

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