भारतीय किसान संघ ने मुख्यमंत्री व लोकसभा अध्यक्ष से की सख्त कार्रवाई की मांग
खातोली : तहसील खातोली क्षेत्र के कैथूदा और बगावदा गांवों के बीच स्थित सरकारी सिवायचक भूमि एवं वन क्षेत्र में कथित अवैध कटाई को लेकर भारतीय किसान संघ ने राज्य सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने राजस्थान के मुख्यमंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष को ज्ञापन भेजकर लकड़ी माफिया, भू-माफिया और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर आरोप लगाए हैं तथा मामले में तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग की है।
यह ज्ञापन खातोली नायब तहसीलदार जुगल किशोर नागर के माध्यम से भेजा गया। भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष किशन गोपाल नागर और मंत्री रविन्द्र नाथ योगी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि वर्षों पुराने हरे-भरे जंगलों को योजनाबद्ध तरीके से उजाड़ा जा रहा है, जिससे पर्यावरण, वन्यजीव और ग्रामीणों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
संघ के अनुसार 15 मई 2026 को विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के बाद यह मामला गंभीर रूप से सामने आया। आरोप है कि कैथूदा और बगावदा के बीच स्थित सिवायचक भूमि पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जा रही है। लकड़ी माफिया जेसीबी मशीनों की मदद से पेड़ों को जड़ सहित उखाड़कर ट्रकों में भरकर बाहर भेज रहे हैं।
भारतीय किसान संघ ने आरोप लगाया कि ज्यूलीफ्लोरा (विलायती बबूल) के सीमित कटान की अनुमति का दुरुपयोग करते हुए अन्य प्रजातियों के हरे पेड़ों को भी काटा जा रहा है, जिससे क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन लगातार बिगड़ रहा है।
वन्यजीवों के अस्तित्व पर संकट
ज्ञापन में कहा गया है कि जंगलों के तेजी से खत्म होने के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। भोजन और आश्रय की तलाश में वन्यजीव अब खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं।
संघ ने आशंका जताई कि जंगलों के खत्म होने के साथ ही रात के समय वन्यजीवों के अवैध शिकार की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। इससे ग्रामीणों में भय और असुरक्षा का माहौल बनता जा रहा है।
पशुपालकों के सामने गहराया चारे का संकट
भारतीय किसान संघ ने बताया कि जंगल और गौचर भूमि के लगातार कम होने से पशुपालकों के सामने गंभीर चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पशुपालन पर आधारित है, ऐसे में वन क्षेत्र की कटाई सीधे ग्रामीणों की आजीविका पर असर डाल रही है।
प्रशासन पर निष्क्रियता के आरोप
संघ ने आरोप लगाया कि ग्रामीणों द्वारा कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद संबंधित विभागों ने केवल औपचारिक आश्वासन दिए, लेकिन धरातल पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इससे लकड़ी माफिया के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
कानूनी प्रावधानों का दिया हवाला
ज्ञापन में राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, वन अधिनियम 1953 तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि सिवायचक भूमि राज्य सरकार की संपत्ति होती है और बिना अनुमति पेड़ कटान व अतिक्रमण गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में कठोर दंड का प्रावधान है।
भारतीय किसान संघ की प्रमुख मांगें
संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि—
* कैथूदा-बगावदा क्षेत्र में हो रही अवैध कटाई को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
* लकड़ी माफिया एवं मामले में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
* उजाड़े गए क्षेत्र में वन विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण कराया जाए।
* सिवायचक भूमि की पैमाइश एवं सीमांकन कर अतिक्रमण हटाया जाए।
* क्षेत्र में वन विभाग की नियमित गश्त और निगरानी सुनिश्चित की जाए।
आंदोलन की चेतावनी
भारतीय किसान संघ ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी दिनों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से बड़ा आंदोलन करेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
इस दौरान कोटा संभाग युवा प्रमुख जितेन्द्र कुमार नागर, तहसील अध्यक्ष किशन गोपाल नागर, मंत्री रविन्द्र नाथ योगी, पर्यावरण प्रमुख मुकेश नागर, कृषि विपणन प्रमुख रमाकांत गोयल, खातोली नगर उपाध्यक्ष नरेश सोनी, भेरूलाल नागर, गिरिराज धाकड़ तलाव सहित कई किसान कार्यकर्ता मौजूद रहे। ज्ञापन की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर कोटा, ग्रामीण पुलिस अधीक्षक कोटा तथा उप वन संरक्षक कोटा को भी भेजी गई है।
रिपोर्टर : आकाश बैरवा

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