अदरक की खेती से कमाई का बढ़िया मौका, बुवाई से कटाई तक जाने सबकुछ...
बुवाई से पहले अदरक के कंदों को मैनकोजेब (3 ग्राम प्रति लीटर पानी) में लगभग 30 मिनट तक भिगोकर छाया में सुखाना चाहिए। इससे फसल में रोग लगने की संभावना कम हो जाती है। इसके बाद क्यारी या मेड बनाकर बुवाई करें, जिसमें पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30-45 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 15-20 सेमी रखें। कंदों को 5-7 सेमी गहराई पर बोकर ऊपर से गोबर की खाद या मिट्टी से ढक दें।
खाद एवं उर्वरक प्रबंधन
अदरक की अच्छी पैदावार के लिए प्रति एकड़ 2-3 टन गोबर की खाद या अधिक मात्रा में जैविक खाद का प्रयोग करना लाभकारी होता है। इसके साथ ही रासायनिक उर्वरक के रूप में NPK 50:40:40 किग्रा प्रति एकड़ देना उपयुक्त माना जाता है। इसमें आधी नाइट्रोजन बुवाई के समय दी जाती है, जबकि बाकी दो बराबर हिस्सों में 45 और 90 दिन बाद डालनी चाहिए।
सिंचाई प्रबंधन
फसल की शुरुआती अवस्था में हल्की सिंचाई करें। बारिश के मौसम में आवश्यकता अनुसार ही पानी दें ताकि जलभराव न हो। सूखे समय में लगभग 7 से 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करना उचित रहता है, जिससे फसल स्वस्थ बनी रहती है।
कटाई का समय और उपज
अदरक की फसल लगभग 8 से 9 महीने में तैयार हो जाती है। दिसंबर-जनवरी के आसपास जब पौधों की पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगें, तब फसल की कटाई की जाती है। हल्के हाथ से खुदाई कर कंदों को निकालना चाहिए। अदरक की खेती मेहनत मांगती है, लेकिन सही तरीके अपनाने पर यह अच्छी आमदनी देने वाली फसल साबित होती है।


No Previous Comments found.