बसपा से छिनकर भाजपा के पाले में आई सीट: फतेहाबाद में कैसे मजबूत हुआ कमल का किला?
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले की फतेहाबाद विधानसभा सीट...जहां 2012 में मुकाबला इतना कांटे का था कि जीत और हार के बीच सिर्फ 699 वोटों का अंतर रहा! बहुजन समाज पार्टी के छोटेलाल वर्मा ने समाजवादी पार्टी के राजेंद्र सिंह को बेहद करीबी मुकाबले में शिकस्त दी। लेकिन 2017 में सियासी तस्वीर बदल गई और भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर कब्जा जमा लिया। इसके बाद 2022 में BJP ने एक बार फिर जीत दर्ज की, और इस बार मैदान में थे वही छोटेलाल वर्मा, जिन्होंने 2012 में BSP के टिकट पर जीत हासिल की थी। यानी एक ही नेता, दो अलग-अलग पार्टियां और जीत का बदलता हुआ गणित! आखिर फतेहाबाद में कैसे बदले सियासी समीकरण? 2012 से 2022 तक किस पार्टी का पलड़ा भारी रहा और 2027 में क्या फिर खिलेगा कमल? आइए समझते हैं फतेहाबाद विधानसभा सीट का पूरा चुनावी इतिहास।
सबसे पहले बात करते हैं साल 2012 के विधानसभा चुनाव की। उस समय फतेहाबाद सीट पर बहुजन समाज पार्टी के छोटेलाल वर्मा और समाजवादी पार्टी के राजेंद्र सिंह के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला था। BSP के छोटेलाल वर्मा को 73,098 वोट मिले, जबकि SP के राजेंद्र सिंह को 72,399 वोट हासिल हुए। नतीजा यह रहा कि छोटेलाल वर्मा ने महज 699 वोटों से जीत दर्ज कर ली। तीसरे स्थान पर भारतीय जनता पार्टी के गिर्राज सिंह कुशवाहा रहे, जिन्हें 20,502 वोट मिले। वहीं RSMD के राहुल सिसोदिया को 11,807 वोट हासिल हुए। इस चुनाव में मतदान प्रतिशत 69.53 रहा। नतीजों ने दिखा दिया कि फतेहाबाद में BSP और SP के बीच मुकाबला कितना कड़ा था। जीत का अंतर एक हजार वोटों से भी कम रहा, यानी कुछ सौ वोटों का अंतर चुनावी तस्वीर बदल सकता था। लेकिन 2012 में बेहद करीबी जीत हासिल करने वाली BSP के लिए अगले चुनाव में चुनौती और बड़ी होने वाली थी।
अब आते हैं साल 2017 के विधानसभा चुनाव पर। इस बार फतेहाबाद में भारतीय जनता पार्टी ने जोरदार वापसी की। BJP के जितेंद्र वर्मा ने समाजवादी पार्टी के राजेंद्र सिंह को बड़े अंतर से हराकर सीट अपने नाम कर ली। जितेंद्र वर्मा को 1,01,960 वोट मिले, जबकि SP के राजेंद्र सिंह को 67,596 वोट हासिल हुए। दोनों के बीच जीत का अंतर रहा 34,364 वोट। वहीं बहुजन समाज पार्टी के उमेश शर्मा सैथिया 35,050 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस चुनाव में मतदान प्रतिशत लगभग 70.5 रहा। गौर करने वाली बात यह है कि 2012 में जिस राजेंद्र सिंह ने छोटेलाल वर्मा को कड़ी टक्कर दी थी, वे 2017 में BJP के जितेंद्र वर्मा से बड़े अंतर से चुनाव हार गए। 2012 में जहां जीत का फैसला सिर्फ 699 वोटों से हुआ था, वहीं 2017 में BJP ने 34 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की। साफ था कि फतेहाबाद की चुनावी तस्वीर में बड़ा बदलाव आया था।
अब बात करते हैं 2022 के विधानसभा चुनाव की। इस चुनाव में BJP ने फतेहाबाद सीट से छोटेलाल वर्मा को उम्मीदवार बनाया। वही छोटेलाल वर्मा, जिन्होंने 2012 में BSP के टिकट पर जीत हासिल की थी। इस बार उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी की रुपाली दीक्षित से हुआ। BJP के छोटेलाल वर्मा को 1,08,811 वोट मिले, जबकि SP की रुपाली दीक्षित को 55,576 वोट हासिल हुए। छोटेलाल वर्मा ने 53,235 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की और BJP ने फतेहाबाद सीट पर लगातार दूसरी बार कब्जा बरकरार रखा। इस चुनाव में मतदान प्रतिशत लगभग 66.86 रहा। यहां सबसे अहम बात जीत का अंतर है। 2017 में BJP ने 34,364 वोटों से जीत हासिल की थी, जबकि 2022 में यह अंतर बढ़कर 53,235 वोट हो गया। यानी पिछले चुनाव के मुकाबले जीत का अंतर 18,871 वोट बढ़ गया। इस तरह छोटेलाल वर्मा ने फतेहाबाद की राजनीति में एक खास रिकॉर्ड बनाया 2012 में BSP के टिकट पर विधायक बने और 2022 में BJP के टिकट पर दोबारा विधानसभा पहुंचे।
अब सबसे बड़ा सवाल 2027 के विधानसभा चुनाव में फतेहाबाद की जनता किसे चुनेगी? क्या BJP अपने लगातार दो चुनावों की जीत को बरकरार रख पाएगी? क्या समाजवादी पार्टी पिछली हार से सबक लेकर मजबूत चुनौती पेश करेगी? और क्या BSP फिर से इस सीट पर अपनी पुरानी राजनीतिक पकड़ बनाने की कोशिश करेगी? इन सवालों का जवाब अभी भविष्य के गर्भ में है। 2027 का चुनावी मुकाबला उम्मीदवारों, पार्टियों की रणनीति, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं के रुझान पर निर्भर करेगा। फिलहाल पिछले तीन चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि फतेहाबाद में 2012 से 2022 के बीच राजनीतिक तस्वीर बदली है। BSP की करीबी जीत के बाद BJP ने लगातार दो चुनाव जीते और 2022 में जीत का अंतर भी बढ़ाया। लेकिन राजनीति में पुराने नतीजे भविष्य की जीत की गारंटी नहीं होते। फतेहाबाद में 2027 की लड़ाई दिलचस्प होगी या नहीं, यह आने वाले समय में साफ होगा।
तो यह था आगरा जिले की फतेहाबाद विधानसभा सीट का चुनावी सफर 2012 में BSP की 699 वोटों से जीत, 2017 में BJP की बड़ी वापसी और 2022 में छोटेलाल वर्मा की शानदार जीत। अब देखना होगा कि 2027 में BJP अपना कब्जा बरकरार रखती है या विपक्ष इस सीट पर नया सियासी समीकरण तैयार करता है।

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