प्राइवेट हॉस्पिटलों के रजिस्ट्रेशन के नाम पर बाबू कर रहा उगाही

फतेहपुर : सीएमओ कार्यालय में तैनात एक बाबू जी को झोलाछाप की कुर्सी इतनी प्रिय है कि आज तक उस कुर्सी का मुंह छोड़ नहीं पाए | हॉस्पिटल, पैथोलॉजी,पॉलीक्लिनिक व क्लीनिक के रजिस्ट्रेशन के लिए इन्हीं बाबूजी से मिलना पड़ता है | इसके बाद बाबूजी का खेल शुरू हो जाता है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्राइवेट हॉस्पिटलों के रजिस्ट्रेशन के लिए 90000, पॉलीक्लिनिक के लिए 50000, क्लीनिक के लिए 40000, पैथोलॉजी सेंटर के लिए 40000, का बाबू जी के द्वारा रेट फिक्स किया गया है | साथ ही प्राइवेट हॉस्पिटलों के रिन्यूअल के लिए 5 सालों का रेट 90000 लगाया गया है | प्राइवेट हॉस्पिटल,पैथोलॉजी, क्लीनिक,पॉलीक्लिनिक के लिए इन बाबूजी से बिना मिले सीएमओ कार्यालय में कोई भी कार्य नहीं होता है,बाबूजी के आशीर्वाद मिलने के बाद ही हॉस्पिटल चला सकते हैं | चर्चा है कि बाबूजी पीछे की कुर्सी में  बैठकर पूरा गेम खेलते है और इनको  मास्टरमाइंड भी कहा जाता है | बाबू जी इतने मास्टरमाइंड है कि विगत समय से झोलाछाप विभाग के सभी कार्यों को छोड़ने की बात कहते हुए नजर आते है और दूसरे कर्मचारी को चारा बनाते हुए अपना कार्य अभी भी कर रहे है |  चर्चा तो यह भी है कि रुपए देने के बाद प्राइवेट हॉस्पिटल, पैथोलॉजी, पॉलीक्लिनिक,क्लीनिक में डॉक्टर हो या ना हो कोई दिक्कत नहीं होती है कभी कोई मामला प्रकाश में आता भी है तो  नोटिस – नोटिस खेल कर मामले को रफा दफा कर देते हैं | ऐसे ही कुछ हॉस्पिटल विगत वर्षों से अवैध रूप से संचालित किए जा रहे हैं जिममें इन बाबूजी के द्वारा पूर्व में निरीक्षण करते हुए आकाश, प्रकाश,आशीर्वाद, राधे कृष्णा, हॉस्पिटलो को नोटिस दी गई थी | लेकिन इसके बावजूद आज तक इन हॉस्पिटलों में कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है | अगर संबंधित अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए बाबू जी की जांच कराई जाए तो जरूर बाबू जी की काली कमाई राज से उठ सकता है पर्दा |

रिपोर्टर : अमित कुमार

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