सरकारी इलाज के नाम पर वसूली - ट्रॉमा सेंटर में तीमारदारों से बाहर से मंगाई जा रही महंगी दवाएं

फतेहपुर - जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में मरीजों के तीमारदारों के शोषण का खेल बदस्तूर जारी है। सरकार भले ही सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज का दावा करे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। यहां मरीजों को एक छोटी सी पर्ची थमाकर बाहर के मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं और इंजेक्शन मंगवाए जा रहे हैं।ताजा मामला आज सुबह का है। 

खागा कोतवाली क्षेत्र के पेरी गांव निवासी पुत्तन पाल का 21 वर्षीय पुत्र सर्वेश पाल आज सुबह अपने गांव के पास धान के खेत में खाद डाल रहा था। तभी उसे एक जहरीले सांप ने काट लिया। परिजनों को जानकारी होते ही आनन-फानन में उसे निजी वाहन से लगभग 11 बजे सदर अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर लाया गया।पीड़ित के तीमारदार राम औतार ने बताया कि अस्पताल में भर्ती करने के बाद स्टाफ ने एक पर्ची देते हुए कहा कि यह इंजेक्शन अस्पताल में उपलब्ध नहीं है, इसे बाहर से लाना पड़ेगा। मजबूरी में तीमारदार बाहर मेडिकल स्टोर पर गया तो उस इंजेक्शन के लिए उसे 740 रुपये चुकाने पड़े। राम औतार ने मीडिया से कहा, "मरीज को जहरीले सांप ने काटा है। हम सरकारी अस्पताल इस उम्मीद से आए थे कि यहां मुफ्त इलाज मिलेगा, क्योंकि सरकारी अस्पताल में सारी दवाएं फ्री बताई जाती हैं। लेकिन यहां स्टाफ ने बाहर से इंजेक्शन मंगवाया, जिसके 740 रुपये देने पड़े। सवाल यह है कि जब सांप काटने जैसी इमरजेंसी के लिए एंटी स्नेक वेनम और अन्य जरूरी इंजेक्शन सरकार द्वारा अस्पताल में उपलब्ध कराए जाते हैं, तो फिर मरीजों को बाहर से क्यों खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है? इससे गरीब मरीजों के लिए मुफ्त इलाज का सरकारी दावा सिर्फ कागजों तक ही सीमित नजर आ रहा है।

रिपोर्टर - शारिब कमर 

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