आजादी से आज तक नहीं बना रास्ता, मौत के आगोश में समाया वृद्ध, ग्रामीणों में आक्रोश
फतेहपुर : आजादी के दशकों बाद भी गांव तक पक्की सड़क न पहुंचने का दंश सरकंडी के मजरे नंदन बाबा का डेरा के ग्रामीण झेल रहे हैं। बारिश में कीचड़ से लथपथ रास्ता ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया है। मंगलवार रात इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की तैयारी के दौरान 60 वर्षीय रामदेव निषाद की मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव तक पक्का रास्ता होता तो समय पर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाना आसान होता। वृद्ध की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है और उन्होंने सरकार के मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के दावों पर सवाल उठाए हैं।
नंदन बाबा का डेरा निवासी रामदेव निषाद पुत्र स्व. भदई मंगलवार को दिनभर अपने तीन बीघे खेत में धान की फसल से खरपतवार निकालते रहे। शाम को घर लौटे और रात करीब आठ बजे खाना खाने के बाद चारपाई पर सो गए। रात करीब 12 बजे उन्होंने पत्नी तेजनी देवी को बुलाकर ठंड लगने की बात कही। पत्नी ने पड़ोसियों के माध्यम से सुकुरु का डेरा में रह रहे बेटों को सूचना दी। बेटे मौके पर पहुंचे और उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी करने लगे, लेकिन देर रात करीब एक बजे रामदेव ने दम तोड़ दिया।
इसके बाद जो तस्वीर सामने आई, उसने गांव की बदहाल व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी। परिजन वृद्ध के शव को चारपाई पर रखकर कंधों के सहारे कीचड़ भरे रास्ते से गांव के दूसरे घर तक ले गए। इस दौरान ग्रामीणों ने वीडियो बनाकर व्यवस्था की बदहाली को कैमरे में कैद कर लिया। बारिश के कारण रास्ते की हालत इतनी खराब थी कि एंबुलेंस या निजी चार पहिया वाहन का गांव तक पहुंचना मुश्किल था।
ग्रामीण मातादीन तिवारी, रजोल तिवारी, कल्लू तिवारी, सोनू निषाद, शंकर तिवारी, संतोष तिवारी, रामौतार, हरिश्चंद्र और विनय निषाद आदि ने कहा कि आजादी के बाद से अब तक गांव तक पक्का रास्ता नहीं बन सका है। चुनाव के दौरान सड़क बनवाने समेत मूलभूत सुविधाएं देने के वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही ग्रामीणों की समस्याएं फिर हाशिये पर चली जाती हैं। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क न होने से केवल आवागमन ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि बीमारी और आपात स्थिति में लोगों की जान पर भी बन आती है।
ग्रामीणों ने कहा कि सरकार गांव-गांव सड़क, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के दावे करती है, लेकिन नंदन बाबा का डेरा की तस्वीर इन दावों की पोल खोल रही है। यहां आज भी मरीजों को वाहन के बजाय चारपाई पर ढोना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गांव तक पक्का रास्ता बनवाने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।
रामदेव निषाद के तीन बेटे बाबू, मुन्ना और ज्ञान तथा तीन बेटियां रज्जी देवी, भोड़ा देवी और राजकुमारी हैं। सभी की शादी हो चुकी है। अंतिम संस्कार यमुना नदी किनारे तेलान बाबा घाट सरकंडी खास पर किया गया। पत्नी तेजनी देवी, बेटे-बेटियों, बहुओं, नाती-नातिन और अन्य रिश्तेदारों का रो-रोकर हाल बेहाल रहा।
रिपोर्टर : शहंशाह आब्दी
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