शिक्षिका ने बदल दी स्कूल की तस्वीर

फतेहपुर । शिक्षक दिवस पर जब हम बड़े-बड़े नामों को याद करते हैं, तब फतेहपुर की धरती पर एक नाम ऐसा भी है जिसने बिना शोर के, बिना संसाधन के, सिर्फ मेहनत से शिक्षा की परिभाषा ही बदल दी। नाम है आसिया फारूकी।यह कहानी किसी बड़े प्राइवेट स्कूल की नहीं है। यह कहानी उस विद्यालय की है जहाँ कभी सीमित संसाधन थे, और पढ़ाने के लिए सिर्फ एक शिक्षिका ,आसिया फारूकी। लोगों ने कहा , यहाँ क्या होगा,लेकिन आसिया  ने इसे ही अपना संकल्प बना लिया।उन्होंने स्कूल को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने क्लासरूम को प्रयोगशाला बना दिया।उनका मंत्र एकदम अलग है  पढ़ाई  संस्कार विकास,बच्चों में किताबी ज्ञान के साथ-साथ नेतृत्व करने की क्षमता पैदा की।स्वच्छता को रोज की प्रार्थना बनाया, पर्यावरण संरक्षण को बच्चों का खेल बनाया।रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी को सिलेबस का हिस्सा बना दिया, वो भी बिना किसी सरकारी आदेश के।और सबसे दिल छूने वाली बात,

हर साल जब बेटियां आगे पढ़ने में हिचकती हैं, तो आसिया जी अपने खुद के पैसों से उन्हें साइकिल उपहार में देती हैं। एक साइकिल नहीं, एक हौसला देती हैं कि - रुको मत, आगे बढ़ो। इसी वजह से उनके क्षेत्र में बालिका शिक्षा का ड्रॉपआउट लगभग खत्म हो गया है।इसी उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें 2019 में राज्य अध्यापक पुरस्कार, 2021 में मिशन शक्ति पुरस्कार और 2023 में राष्ट्रीय अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका आसिया फारूकी आज उन गिने-चुने शिक्षकों में हैं, जिनका नाम सम्मान से लिया जाता है। उन्होंने साबित कर दिया कि बदलने के लिए बिल्डिंग नहीं, नियत चाहिए।

रिपोर्टर - शारिब कमर 

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