बरसात है, बीमारी है, पर डॉक्टर नहीं है

फतेहपुर :  जिले के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। बरसात के मौसम में जब बुखार, उल्टी-दस्त और संक्रामक बीमारियों का प्रकोप सबसे ज्यादा है, तब ग्रामीणों के सबसे करीबी अस्पतालों में ही ताला लटकने जैसी स्थिति है।मामला जिले के चार एडिशनल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों  टिकारी, छीछनी, संवत और ललौली का है। यहां न पर्याप्त डॉक्टर हैं, न पैरामेडिकल स्टाफ। नतीजा, रोजाना पहुंच रहे मरीज बिना इलाज के ही लौटने को मजबूर हैं।ग्रामीणों ने बताया कि केंद्र पर डॉक्टर की तैनाती न होने से मामूली बुखार के लिए भी उन्हें 30-40 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल या फिर महंगे निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। कई बार इमरजेंसी में मरीजों की हालत रास्ते में ही बिगड़ जाती है।एक ग्रामीण ने कहा, "केंद्र बना है, बिल्डिंग है, पर अंदर स्टाफ नहीं है। बरसात में बच्चे सबसे ज्यादा बीमार पड़ रहे हैं, पर दिखाने के लिए कोई डॉक्टर ही नहीं मिलता।ग्रामीणों के मुताबिक इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है।बरसात में कमजोर पड़ी यह स्वास्थ्य व्यवस्था अब ग्रामीणों में आक्रोश की वजह बनती जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि चारों स्वास्थ्य केंद्रों पर तत्काल प्रभाव से चिकित्सकों और आवश्यक स्टाफ की तैनाती की जाए, ताकि गरीब ग्रामीणों को उनके गांव के पास ही इलाज मिल सके।

रिपोर्टर : शहंशाह आब्दी 

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