पहले सुधारी गई त्रुटि के बाद फिर मतदाता सूची से नाम गायब, निर्वाचन व्यवस्था पर उठे सवाल
फतेहपुर : मतदाता सूची में पहले सुधारी जा चुकी त्रुटि के बावजूद दोबारा नाम हटाए जाने का मामला सामने आया है। बिन्दकी निवासी एक महिला मतदाता का नाम मतदाता सूची से डिलीट किए जाने पर अधिवक्ता अमजद खान ने भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को शिकायती प्रार्थना पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच, नाम पुनः सम्मिलित कराने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान भी संबंधित महिला मतदाता के नाम में त्रुटि का मामला सामने आया था। इस संबंध में 19 दिसंबर 2025 को शिकायत दर्ज कराई गई थी। उस समय बूथ संख्या 152 के क्रमांक 1072 पर नाम संबंधी त्रुटि के कारण फॉर्म-8 भरने को कहा गया था। हालांकि, शिकायतकर्ता का दावा है कि त्रुटि मतदाता की ओर से नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर हुई थी। मामले में नायब तहसीलदार ने संज्ञान लेकर सुधार भी कराया था।
इसके बावजूद महिला मतदाता का नाम दोबारा हटाए जाने से निर्वाचन अभिलेखों के सत्यापन और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता ने निर्वाचन आयोग से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि पूर्व में सुधार हो जाने के बाद नाम दोबारा किस आधार पर हटाया गया और क्या इस कार्रवाई से पहले पुराने शिकायत अभिलेखों तथा सुधार की स्थिति का सत्यापन किया गया था।
प्रशासनिक त्रुटि का खामियाजा मतदाता क्यों भुगते?
अधिवक्ता अमजद खान ने शिकायत में सवाल उठाया है कि यदि नाम हटाए जाने के पीछे प्रशासनिक त्रुटि है, तो उसके सुधार के लिए संबंधित मतदाता को बार-बार आवेदन करने, नए दस्तावेज देने और औपचारिकताएं पूरी करने के लिए बाध्य करना कितना उचित है।
उन्होंने मांग की है कि पहले की शिकायत और सुधार संबंधी अभिलेखों के आधार पर पूरे मामले की जांच कराई जाए। यदि नाम का विलोपन त्रुटिपूर्ण पाया जाता है, तो नियमानुसार उसे पुनः सम्मिलित कराया जाए। साथ ही, यदि नाम दोबारा जोड़ने के लिए किसी नए आवेदन या अन्य औपचारिकता की वैधानिक आवश्यकता है, तो उसका स्पष्ट कानूनी आधार लिखित रूप में बताया जाए।
नाम हटाने का आधार और जिम्मेदार अधिकारियों का विवरण मांगा।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को भेजे गए प्रार्थना पत्र में नाम विलोपन का आधार, संबंधित आदेश तथा जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी का विवरण उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त, पूर्व शिकायत और नायब तहसीलदार द्वारा कराए गए सुधार का सत्यापन कराकर समयबद्ध जांच करने तथा किसी भी लापरवाही की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि मतदाता सूची में नाम का होना नागरिक के निर्वाचन संबंधी अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में पहले सुधारी जा चुकी त्रुटि के बाद दोबारा नाम हटने के मामले को केवल औपचारिक शिकायत निस्तारण तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। यह पता लगाना जरूरी है कि विलोपन किन परिस्थितियों में हुआ और पूर्व में किए गए सुधार के बावजूद ऐसी स्थिति दोबारा क्यों बनी। अब देखना होगा कि निर्वाचन आयोग और संबंधित निर्वाचन अधिकारी इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं। फिलहाल शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पुराने अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए, त्रुटिपूर्ण विलोपन पाए जाने पर महिला मतदाता का नाम नियमानुसार पुनः जोड़ा जाए और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
रिपोर्टर : शहंशाह आब्दी

No Previous Comments found.