डीएम के जागरूकता अभियान के बीच रामपुर थरियांव के पास जली पराली
फतेहपुर : जनपद में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने और किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से अभियान चलाया जा रहा है। मंगलवार को जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और किसानों को पराली न जलाने के प्रति जागरूक करने की पहल की। प्रशासन का उद्देश्य किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी देना और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। हालांकि, इसी बीच एक वीडियो इंटरनेट बड़ी तेजी से वायरल हो जो कि बताया जा रहा है कि रामपुर थरियांव के पास पराली जलाए जाने का है, जिससे जागरूकता अभियान के बीच ही प्रशासन की अपील के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।जिलाधिकारी की ओर से शुरू किए गए जागरूकता अभियान के तहत किसानों से अपील की जा रही है कि वे खेतों में फसल अवशेष न जलाएं और पराली के उचित प्रबंधन के विकल्प अपनाएं। पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है। इससे वातावरण की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ ही लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसके अलावा खेतों की मिट्टी में मौजूद उपयोगी सूक्ष्मजीवों को नुकसान पहुंचने और मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसके बावजूद रामपुर थरियांव के पास पराली जलाए जाने की सूचना सामने आने से अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर जिला प्रशासन किसानों को जागरूक करने के लिए प्रचार वाहन के माध्यम से संदेश दे रहा है, वहीं दूसरी ओर पराली जलाने की घटनाएं सामने आना चिंता का विषय है। ऐसे में जरूरी है कि संबंधित क्षेत्र में मामले की जांच कराई जाए और यदि पराली जलाने की पुष्टि होती है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए। फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर किसानों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर निगरानी भी जरूरी है। किसानों को पराली निस्तारण के वैकल्पिक तरीकों की जानकारी उपलब्ध कराना और कृषि विभाग की योजनाओं से जोड़ना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। अब देखना होगा कि रामपुर थरियांव के पास सामने आए इस वायरल वीडियो को जिला प्रशासन कितनी गंभीरता से लेता है और पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
रिपोर्टर : शहंशाह आब्दी

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