कभी 6 हजार वोटों की टक्कर...तो कभी भाजपा की आंधी! जानिए फतेहपुर सीकरी सीट की पूरी कहानी

उत्तर प्रदेश की सियासत में आज बात आगरा जिले की फतेहपुर सीकरी विधानसभा सीट की, जहां पिछले तीन चुनावों में जीत की तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आई। साल 2012 में बहुजन समाज पार्टी ने बाजी मारी, लेकिन 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने ऐसा चुनावी पलटवार किया कि जीत का अंतर 5 हजार से सीधे 52 हजार वोटों के पार पहुंच गया। इसके बाद 2022 में भाजपा ने उम्मीदवार बदला, लेकिन जीत का सिलसिला जारी रखा। जी हां, फतेहपुर सीकरी की चुनावी कहानी में कई दिलचस्प मोड़ हैं। साल 2012 में बसपा के सूरजपाल सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमार चाहर को महज 5 हजार 623 वोटों से हराया था। मुकाबला करीबी था और नतीजे ने विधानसभा में बसपा की जीत पर मुहर लगा दी। लेकिन 2017 आते-आते तस्वीर बदल गई। भाजपा के चौधरी उदयभान सिंह ने बसपा के सूरजपाल सिंह को 52 हजार 337 वोटों के बड़े अंतर से हराया। यानी जिस सीट पर 2012 में जीत का अंतर 6 हजार वोटों से भी कम था, वहां पांच साल बाद भाजपा ने बड़ी बढ़त के साथ जीत दर्ज की। अब सवाल है कि आखिर फतेहपुर सीकरी में 2012 से 2022 के बीच ऐसा क्या बदला? 2017 में भाजपा को इतनी बड़ी बढ़त कैसे मिली? 2022 में उम्मीदवार बदलने के बाद भी पार्टी जीतने में कैसे कामयाब रही? और सबसे बड़ा सवाल 2027 के विधानसभा चुनाव में क्या भाजपा अपनी जीत की हैट्रिक लगा पाएगी, या विपक्ष इस सीट पर नया समीकरण तैयार करेगा? आइए, पिछले तीन विधानसभा चुनावों के नतीजों और वोटों के पूरे गणित के जरिए समझते हैं फतेहपुर सीकरी की चुनावी कहानी।

सबसे पहले बात करते हैं साल 2012 के विधानसभा चुनाव की। उस समय फतेहपुर सीकरी सीट पर बहुजन समाज पार्टी के सूरजपाल सिंह ने जीत दर्ज की थी। उनके सामने निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमार चाहर थे। चुनाव के नतीजों में सूरजपाल सिंह को 67 हजार 191 वोट मिले, जबकि राजकुमार चाहर को 61 हजार 568 वोट प्राप्त हुए। दोनों के बीच जीत का अंतर सिर्फ 5 हजार 623 वोट रहा। इस तरह सूरजपाल सिंह ने करीबी मुकाबले में जीत हासिल करके विधानसभा में अपनी जगह बनाई। उस चुनाव में मतदान प्रतिशत 66.14 रहा। वोटों के आंकड़े बताते हैं कि विजेता और दूसरे स्थान पर रहने वाले उम्मीदवार के बीच ज्यादा बड़ा अंतर नहीं था। निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमार चाहर ने भी बड़ी संख्या में वोट हासिल किए। यानी 2012 में फतेहपुर सीकरी का चुनाव काफी दिलचस्प रहा। बसपा ने सीट जीती, लेकिन मुकाबले में निर्दलीय उम्मीदवार ने भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। हालांकि, पांच साल बाद होने वाले चुनाव में नतीजे बिल्कुल अलग होने वाले थे। 2017 में भाजपा ने इस सीट पर जीत हासिल करके राजनीतिक समीकरण बदल दिया।

अब बात करते हैं साल 2017 के विधानसभा चुनाव की। इस बार भाजपा ने चौधरी उदयभान सिंह को उम्मीदवार बनाया और उन्होंने जीत दर्ज करके फतेहपुर सीकरी सीट पर पार्टी का खाता खोला। चौधरी उदयभान सिंह को कुल 1 लाख 8 हजार 586 वोट मिले। वहीं बसपा के सूरजपाल सिंह को 56 हजार 249 वोट प्राप्त हुए। इस तरह भाजपा के चौधरी उदयभान सिंह ने बसपा के सूरजपाल सिंह को 52 हजार 337 वोटों के अंतर से हराया। 2012 के नतीजों से तुलना करें तो बदलाव साफ दिखाई देता है। पिछले चुनाव में बसपा के सूरजपाल सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार को 5 हजार 623 वोटों से हराया था। लेकिन 2017 में वही सूरजपाल सिंह दूसरे स्थान पर पहुंच गए और भाजपा ने बड़े अंतर से जीत हासिल की। इस चुनाव में राष्ट्रीय लोक दल के बृजेश कुमार चाहर को 38 हजार 307 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे। समाजवादी पार्टी के लाल सिंह को 21 हजार 884 वोट प्राप्त हुए और वह चौथे स्थान पर रहे। मतदान प्रतिशत भी बढ़ा। साल 2012 में 66.14 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि 2017 में यह बढ़कर 67.81 प्रतिशत पहुंच गया। इन नतीजों के साथ फतेहपुर सीकरी की सीट पर भाजपा ने अपनी जीत दर्ज की और बसपा को पीछे छोड़ दिया। जीत का अंतर 2012 के मुकाबले काफी ज्यादा था। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। 2022 में एक बार फिर चुनाव हुआ और इस बार भाजपा ने उम्मीदवार बदलने का फैसला किया।

अब आते हैं साल 2022 के विधानसभा चुनाव पर। इस बार भाजपा ने चौधरी उदयभान सिंह की जगह चौधरी बाबूलाल को टिकट दिया। चौधरी बाबूलाल को कुल 1 लाख 12 हजार 95 वोट मिले। राष्ट्रीय लोक दल के बृजेश कुमार चाहर को 64 हजार 826 वोट प्राप्त हुए। इस तरह भाजपा के चौधरी बाबूलाल ने 47 हजार 269 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। बसपा के डॉ. मुकेश कुमार राजपूत 59 हजार 641 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। वहीं कांग्रेस के हेमंत सिंह चाहर को 1 हजार 192 वोट मिले। इस चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि भाजपा ने उम्मीदवार बदलने के बावजूद सीट पर अपनी जीत बरकरार रखी। 2017 में चौधरी उदयभान सिंह जीते थे, जबकि 2022 में चौधरी बाबूलाल ने पार्टी को जीत दिलाई। लेकिन जीत के अंतर में बदलाव भी देखने को मिला। साल 2017 में भाजपा ने 52 हजार 337 वोटों से जीत दर्ज की थी, जबकि 2022 में यह अंतर घटकर 47 हजार 269 वोट रह गया। यानी भाजपा ने सीट तो बरकरार रखी, लेकिन जीत का अंतर 5 हजार 68 वोट कम हो गया। दूसरी तरफ, 2022 में राष्ट्रीय लोक दल दूसरे स्थान पर पहुंच गई और बसपा तीसरे स्थान पर रही। इससे मुकाबले में प्रमुख विपक्षी दलों की स्थिति भी बदली हुई दिखाई दी। मतदान प्रतिशत लगभग 67.4 रहा। इस तरह 2022 के नतीजों ने यह साफ कर दिया कि भाजपा ने लगातार दूसरी बार फतेहपुर सीकरी सीट पर जीत दर्ज की।

अब सबसे बड़ा सवाल 2027 के विधानसभा चुनाव में फतेहपुर सीकरी की तस्वीर कैसी होगी? क्या भाजपा लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर पाएगी? क्या बसपा फिर से मुकाबले में अपनी स्थिति मजबूत कर पाएगी? क्या राष्ट्रीय लोक दल 2022 के प्रदर्शन को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी? और क्या समाजवादी पार्टी तथा कांग्रेस भी इस सीट पर अपनी राजनीतिक स्थिति सुधार पाएंगी? इन सवालों का जवाब अभी तय नहीं है। 2027 के चुनाव में उम्मीदवारों का चयन, राजनीतिक दलों की रणनीति, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं की प्राथमिकताएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। भाजपा के सामने अपनी लगातार दो जीत के सिलसिले को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी। वहीं विपक्षी दलों के सामने मतदाताओं के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने और प्रभावी चुनावी मुकाबला तैयार करने का सवाल रहेगा।

तो यह थी आगरा जिले की फतेहपुर सीकरी विधानसभा सीट की पूरी चुनावी कहानी। साल 2012 में बसपा के सूरजपाल सिंह ने करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की। साल 2017 में भाजपा के चौधरी उदयभान सिंह ने 52 हजार 337 वोटों के बड़े अंतर से सीट जीत ली। फिर 2022 में भाजपा ने चौधरी बाबूलाल को उम्मीदवार बनाया और उन्होंने 47 हजार 269 वोटों से जीत हासिल करके पार्टी का कब्जा बरकरार रखा। तीन चुनावों में एक बार बसपा और दो बार भाजपा ने जीत दर्ज की। अब 2027 में चुनावी समीकरण क्या होंगे, यह देखना दिलचस्प रहेगा। क्या भाजपा जीत की हैट्रिक लगाएगी? क्या विपक्ष इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत करेगा? या फिर चुनाव में कोई नया चेहरा और नया समीकरण सामने आएगा?

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