दुनिया में 72% तक बढ़े दाम, भारत में सिर्फ 3%: तेल संकट की पूरी कहानी

दुनिया में कहीं भी बारूद बरसता है, तो उसका सीधा झटका आम आदमी की जेब और गाड़ियों की टंकी पर लगता है। इस समय पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज में तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुका है। हफ्तेभर के भीतर भारत में भी पेट्रोल-डीजल के दाम दो बार में करीब 4 रुपये तक बढ़ चुके हैं। कीमतों में इस मामूली बढ़ोतरी और कुछ सोशल मीडिया अफवाहों ने देश के कई राज्यों में ऐसा गदर मचाया कि पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों की किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। लोग इस डर से पेट्रोल भरवाने लगे कि कि कहीं तेल खत्म न हो जाए।

छत्तीसगढ़ से लेकर महाराष्ट्र और यूपी तक, हर तरफ हाहाकार जैसी स्थिति बन गई, जबकि सच यह है कि देश में तेल की कोई किल्लत नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों से जो तस्वीरें और खबरें आईं, वे हैरान करने वाली थीं। चंडीगढ़ में सोशल मीडिया पर एक पेट्रोल पंप का फर्जी पोस्टर वायरल हो गया, जिस पर लिखा था कि दोपहिया वाहनों को सिर्फ 500 रुपये और चार पहिया वाहनों को 1500 रुपये का ही तेल मिलेगा। इस अफवाह के उड़ते ही पंपों पर हुजूम उमड़ पड़ा। वहीं महाराष्ट्र के पुणे, जालना और उत्तराखंड के टिहरी में अफवाहों के कारण पैनिक बाइंग हुई और देखते ही देखते कई पेट्रोल पंपों के 'ड्राई' होने की नौबत आ गई। 
वहीं उत्तर प्रदेश के हापुड़ में एक फ्यूल स्टेशन पर पेट्रोल-डीजल खत्म होने की बात सुनकर गुस्साई भीड़ ने तोड़फोड़ तक कर डाली। हालांकि केंद्र सरकार और इंडियन ऑयल जैसी तेल कंपनियों ने साफ किया है कि आपूर्ति में कोई रुकावट नहीं है। तेल की कोई कमी नहीं है, जनता अफवाहों पर ध्यान न दे। कीमतों पर महंगाई का बोझ एक साथ नहीं, बल्कि धीरे-धीरे डाला जाएगा। 
आपको बता दें पाकिस्तान में पेट्रोल 60% और डीजल 50% तक महंगा हो गया। बांग्लादेश में भी 15 से 16% की तेजी आई। वहीं अमेरिका में पेट्रोल 46% और डीजल 48% तक बढ़ गया। मलेशिया में डीजल में 72% की भारी बढ़ोतरी हुई। चीन में पेट्रोल 25% और डीजल 27% महंगा हुआ। इसके अलावा फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया में भी 10% से लेकर 40% तक दाम बढ़े हैं। लेकिन इन सब के मुकाबले भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3% की ही वृद्धि हुई है, जो इस वैश्विक सूची में सबसे कम है। 
दरअसल, भारत में तेल की कीमतें नियंत्रित रहने की सबसे बड़ी वजह सरकार की ठोस रणनीति है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद रूस और अन्य वैकल्पिक स्रोतों से भारी छूट पर कच्चा तेल खरीदना जारी रखा। साथ ही टैक्स में कटौती और तेल कंपनियों पर कड़े नियंत्रण के जरिए आम जनता को वैश्विक महंगाई की सीधी मार से बचा लिया। ऐसे में भारत ने इस चक्रव्यूह को काफी हद तक रोका है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध लंबा खिंचा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बनी रही, तो आने वाले समय में भारतीय बाजार पर भी दबाव बढ़ सकता है। इसलिए पैनिक बाइंग से बचें और सतर्क रहें!

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