पांच वर्षों के विकास कार्यों, निधि और खर्च का हिसाब मांगने पहुंचे ग्रामीण
गढ़चिरौली - अंकिसा ग्रामपंचायत की शुक्रवार को आयोजित ग्रामसभा उस समय चर्चा का केंद्र बन गई, जब गांव के विकास कार्यों, सरकारी निधि और पंचायत के कामकाज का हिसाब जानने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण ग्रामसभा में पहुंचे, लेकिन ग्रामपंचायत के महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकारी ग्रामसेवक ही अनुपस्थित रहे। इससे ग्रामस्थों में नाराजगी दिखाई दी और पंचायत के कामकाज में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे। ग्रामसभा में ग्रामीणों को उम्मीद थी कि पिछले कई वर्षों में हुए विकास कार्यों, प्राप्त सरकारी निधि, खर्च की गई राशि, लंबित कार्यों और आगामी विकास योजनाओं की विस्तृत जानकारी मिलेगी। ग्रामीणों का कहना था कि ग्रामसभा ही वह लोकतांत्रिक मंच है, जहां आम नागरिक पंचायत के कामकाज पर सवाल पूछ सकता है और जिम्मेदारों से जवाब मांग सकता है।
पांच साल के विकास कार्यों का हिसाब कौन देगा?
ग्रामीणों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल थे। पिछले पांच वर्षों में ग्रामपंचायत को विभिन्न योजनाओं के तहत कितना निधि प्राप्त हुआ? उसमें से कितनी राशि खर्च की गई? किन-किन विकास कार्यों को मंजूरी मिली? कितने काम पूरे हुए और कितने अभी भी अधूरे हैं? ग्रामीणों की शिकायतों और मांगों पर क्या कार्रवाई हुई? आगामी विकास कार्यों के लिए क्या नियोजन किया गया है? इन तमाम सवालों का स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब ग्रामसभा में मिलना अपेक्षित था। लेकिन ग्रामसेवक की अनुपस्थिति के कारण कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आ सकी।
ग्रामसभा में अधिकारी मौजूद, फिर भी कई सवाल अनुत्तरित
शुक्रवार की ग्रामसभा सरपंच, उपसरपंच तथा पंचायत समिति के नोडल अधिकारी की उपस्थिति में संपन्न हुई। उपस्थित पदाधिकारियों और अधिकारियों ने ग्रामसभा की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। हालांकि, ग्रामपंचायत के दैनिक प्रशासनिक कामकाज से जुड़े ग्रामसेवक की अनुपस्थिति के कारण ग्रामीणों के अनेक सवालों को अपेक्षित प्रशासनिक जवाब नहीं मिल पाया। इस स्थिति को लेकर ग्रामीणों में चर्चा शुरू हो गई कि जब जनता अपने गांव के विकास का हिसाब पूछने के लिए ग्रामसभा में उपस्थित है, तो जवाब देने वाला संबंधित अधिकारी ही मौजूद क्यों नहीं है?
“गांव को आश्वासन नहीं, हिसाब चाहिए”
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं चाहिए, बल्कि ग्रामपंचायत के कामकाज में पूर्ण पारदर्शिता चाहिए। सरकारी निधि जनता के विकास के लिए आता है, इसलिए उस निधि का उपयोग कहां, कितना और किस काम पर किया गया, इसकी जानकारी ग्रामसभा के सामने रखना आवश्यक है। ग्रामीणों की मांग है कि आगामी ग्रामसभा में पिछले पांच वर्षों के विकास कार्यों, प्राप्त निधि, खर्च की गई राशि, पूर्ण एवं लंबित कार्यों तथा आगामी योजनाओं का विस्तृत लेखा-जोखा ग्रामसभा के सामने प्रस्तुत किया जाए।
गैरहाजिरी ने बढ़ाई चर्चा
ग्रामसेवक की अनुपस्थिति को लेकर अब गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, ग्रामसेवक की अनुपस्थिति का कारण स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है। ऐसे में ग्रामीणों की अपेक्षा है कि संबंधित अधिकारी की अनुपस्थिति का कारण स्पष्ट किया जाए और भविष्य में ग्रामसभा जैसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक मंच पर जिम्मेदार अधिकारी पूरी तैयारी के साथ उपस्थित रहें।
अंकिसा में उठी जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग
ग्रामसभा केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि गांव की जनता को अपने प्रतिनिधियों और प्रशासन से सवाल पूछने का संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक मंच उपलब्ध कराती है। इसलिए ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामसभा में उठाए गए प्रत्येक सवाल को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और उसका स्पष्ट जवाब ग्रामस्थों को मिलना चाहिए। अंकिसा ग्रामसभा की घटना ने पंचायत प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है। अब ग्रामीणों की निगाहें आगामी ग्रामसभा पर टिकी हैं, जहां वे पिछले वर्षों के विकास कार्यों और पंचायत के आर्थिक व्यवहार का स्पष्ट हिसाब मांगने की तैयारी में हैं।
“गांव को हिशोब चाहिए, आश्वासन नहीं।
गांव को पारदर्शी कारभार चाहिए, कागजों पर विकास नहीं। ग्रामसभा में जनता के सवाल होंगे तो जिम्मेदारों के जवाब भी होने चाहिए।” अंकिसा के ग्रामीणों का कहना है कि सवाल पूछना उनका अधिकार है और पारदर्शी जवाब मिलना उनकी अपेक्षा। गांव का विकास तभी संभव है, जब ग्रामसभा मजबूत हो, जनता की भागीदारी बढ़े और पंचायत का कामकाज पूरी पारदर्शिता के साथ हो।
रिपोर्टर - चंद्रशेखर पुलगम
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