अवैध रेत परिवहन मामले में 1.01 करोड़ का जुर्माना अब भी बकाया, प्रशासन की सुस्ती पर सवाल
गडचिरोली : अवैध रेत उत्खनन व परिवहन के खिलाफ की गई कठोर कार्रवाई को एक वर्ष से अधिक समय बीत गया, लेकिन भामरागड़ तहसीलदार द्वारा नागपुर स्थित जी.एस.डी. इंडस्ट्रीज पर ठोका गया ₹1,01,90,300 का भारी-भरकम जुर्माना अब भी सरकारी तिजोरी में जमा नहीं हो पाया है। कार्रवाई पूरी होने के बाद भी वसूली प्रक्रिया ठंडे बस्ते में जाने से प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह विवाद 563 ब्रास रेत के अवैध उत्खनन से जुड़ा है। जागरूक नागरिक संतोष ताटीकोंडावार ने 7 नवंबर 2022 को भामरागड़ तहसीलदार के पास शिकायत दर्ज कराई थी।
जुर्माना क्यों लगाया गया?
कंपनी ने यह साबित करने के लिए कोई पुख्ता दस्तावेज नहीं दिए कि रेत येचली घाट से वैध रूप से लीलामी के तहत निकाली गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने 10 जून से 30 सितंबर तक लागू पाबंदी अवधि में रेत निकासी की थी। नियमों के उल्लंघन पर 29 दिसंबर 2022 को तहसीलदार ने पहली बार जुर्माना ठोका।
अदालतों तक चला मामला
कंपनी ने पहले उपविभागीय अधिकारी (एटापल्ली), फिर अप्पर जिल्हाधिकारी (अहेरी) के पास अपील की, लेकिन दोनों स्तर पर दंड बरकरार रहा। बाद में कंपनी ने मुंबई हाई कोर्ट, नागपुर खंडपीठ में रिट याचिका दायर की। कोर्ट ने यह मामला दोबारा तहसीलदार को सुनवाई के लिए भेजा।
अंतिम आदेश और सात दिन की सख्त समयसीमा
हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार दोबारा सुनवाई करते हुए तहसीलदार ने कंपनी को स्पष्ट आदेश दिया कि सात दिनों के भीतर पूरी राशि सरकारी तिजोरी में जमा करें।
जनकार्यकर्ता ताटीकोंडावार की सक्रिय भूमिका
इस पूरे प्रकरण में शिकायतकर्ता संतोष ताटीकोंडावार की सक्रियता अहम रही।
उन्होंने हाई कोर्ट में CAW No. 1910/2024 in Writ Petition No. 421/2024 के माध्यम से हस्तक्षेप याचिका दाखिल की।
उन्होंने बताया—
> “तहसीलदार स्तर पर न्यायालय के आदेश का पालन करने में स्पष्ट ढिलाई दिख रही थी। इसलिए मुझे यह मामला सीधे राजस्व मंत्री के समक्ष उठाना पड़ा। मंत्री महोदय ने गंभीरता से संज्ञान लेकर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, जिससे सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व मिल सकता था।”
वसूली में देरी से उठे सवाल
महाराष्ट्र जमीन महसूल अधिनियम 1966 के धारा 48(7) के तहत की गई कार्रवाई के बाद भी ₹1.01 करोड़ की वसूली न होना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
अंतिम आदेश आए महीनों बीत चुके हैं।
जुर्माना न वसूल पाने के कारण जिले को मिलने वाला महत्वपूर्ण राजस्व अटका हुआ है।
शिकायतकर्ता की लगातार पैरवी से मामला कानूनी स्तर पर आगे बढ़ा, लेकिन वसूली अभी भी अधर में है।
अब बड़ा सवाल यह है—
आख़िर प्रशासन कब तक यह कार्रवाई पूरी करेगा?
और इस देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कदम उठाए जाएंगे? गडचिरोली जिला इस मामले की वसूली और आगे की कड़ी कार्रवाई पर नजरें लगाए हुए है।
रिपोर्टर : चंद्रशेखर पुलगम

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