आपदा पूर्व तैयारी में समन्वय और तत्परता आवश्यक – जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा

 गढ़चिरौली : जिले में संभावित प्राकृतिक एवं मानव-निर्मित आपदाओं का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय, सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करें। अद्यतन जिला आपदा प्रबंधन योजना के अनुसार निर्धारित जिम्मेदारियों का समय पर निर्वहन सुनिश्चित किया जाए, ऐसे निर्देश जिलाधिकारी तथा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष अविश्यांत पंडा ने दिए। जिलाधिकारी कार्यालय में आज जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्राधिकरण के सदस्य एवं जिले के विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।

जिला आपदा प्रबंधन योजना को स्वीकृति
बैठक में जिला आपदा प्रबंधन योजना पर विस्तार से चर्चा की गई। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी निलेश तेलतुंबडे ने जानकारी दी कि जिले की आपदा संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए यह योजना तैयार की गई है। इसमें संभावित जोखिम, उनके स्वरूप, वर्तमान एवं भविष्य में उत्पन्न होने वाली आपदाएं, नए उभरते खतरे, संवेदनशील क्षेत्र, रोकथाम एवं पूर्व तैयारी की रणनीतियां शामिल की गई हैं। विस्तृत चर्चा के पश्चात जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा इस योजना को सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान की गई।
सभी विभागों को सतर्क रहने के निर्देश
जिलाधिकारी पंडा ने कहा कि आपदा प्रबंधन किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी विभागों के समन्वित प्रयासों से ही प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक विभाग अपने-अपने स्तर पर उपलब्ध संसाधनों, उपकरणों और मानवबल की समीक्षा करे तथा स्वीकृत आपदा प्रबंधन योजना के अनुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करे।
मानव–वन्यजीव संघर्ष पर त्वरित कदम
बैठक में मानव–वन्यजीव संघर्ष के मुद्दे पर भी चर्चा की गई। योजना में इस विषय को विशेष रूप से शामिल किया गया है। वन विभाग द्वारा बताया गया कि वडसा एवं गडचिरोली वन विभाग क्षेत्र में मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। इस पर जिलाधिकारी ने वन विभाग को निर्देश दिए कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तात्कालिक और प्रभावी उपाययोजनाएं लागू की जाएं।
बाढ़ नियंत्रण एवं पूर्व चेतावनी व्यवस्था
मान्सून काल में भामरागड, अहेरी एवं सिरोंचा तालुकों में संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए ग्राम स्तर पर अलर्ट एवं सूचना तंत्र को सज्ज रखने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही बांधों से जल विसर्जन के समय स्वचालित पूर्व चेतावनी प्रणाली (ऑटोमेटिक अलर्ट सिस्टम) को क्रियान्वित करने के आदेश जल संसाधन (पाटबंधारे) विभाग को दिए गए।
भामरागड तालुका क्षेत्र में इंद्रावती, पर्लकोट एवं पामुलगौतम नदियों के कारण उत्पन्न होने वाली बाढ़ की स्थिति का गहन सर्वेक्षण कर आवश्यक उपाययोजनाओं सहित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए गए।
उच्चाधिकारी रहे उपस्थित
इस बैठक में उपवन संरक्षक श्रीमती आर्या वी. एस., उपविभागीय अधिकारी तथा सहायक जिलाधिकारी अरुण एम., निवासी उपजिलाधिकारी आशीष वानखेडे, जल संसाधन विभाग के कार्यकारी अभियंता राहुल मोरघडे, सार्वजनिक बांधकाम विभाग के कार्यकारी अभियंता सुरेश साखरवाडे एवं अविनाश मोरे सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

रिपोर्टर : चंद्रशेखर पुलगम 

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