पल्ली जैसे गांव आत्मनिर्भर विकास का आदर्श मॉडल – सीईओ सुहास गाडे

गडचिरोली - जिल्हे के भामरागड़ तहसील के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में भी स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग से आत्मनिर्भर विकास संभव है। इसका उत्कृष्ट उदाहरण पल्ली गांव है, ऐसा प्रतिपादन जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाडे ने किया। उन्होंने हाल ही में पल्ली और टेकला ग्राम पंचायतों का दौरा कर विभिन्न योजनाओं की जमीनी हकीकत का जायजा लिया और ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। पल्ली गांव में बड़ी संख्या में आम के पेड़, घर-घर में परसबाग (किचन गार्डन), सब्जी उत्पादन तथा कुक्कुट पालन जैसे पूरक रोजगार विकसित होते दिखाई दिए। यहां उत्पादित विषमुक्त सब्जियां भामरागड़ बाजार में अच्छी मांग के साथ बिक रही हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। इस दौरान गाडे ने आम उत्पादन का मूल्यवर्धन कर स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

ग्राम पंचायत कार्यालय में आयोजित बैठक में उन्होंने सरपंच, ग्रामीणों और महिला बचत समूहों के सदस्यों से चर्चा करते हुए विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने बचत समूहों को दिए गए निधि का उपयोग कुक्कुट पालन, बकरी पालन और सब्जी खेती जैसे आयवर्धक कार्यों में करने पर जोर दिया। साथ ही समुदाय निवेश निधि (CIF) का प्रभावी उपयोग कर आय बढ़ाने के अवसर सृजित करने का आह्वान किया। स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के दौरान पल्ली के प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र का निरीक्षण कर दवाओं के स्टॉक की जांच की गई। महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, एनीमिया की स्थिति, स्वास्थ्य शिविर, फोलिक एसिड गोलियों का वितरण तथा आयुष्मान भारत योजना के लाभों की जानकारी ली गई। आंगनवाड़ी में बच्चों का वजन-ऊंचाई मापन, पोषण आहार वितरण और स्वच्छता सुविधाओं की भी जांच की गई। आशा कार्यकर्ताओं की नियमितता और सेवा वितरण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। ग्रामविकास के तहत 15वें वित्त आयोग के निधि, दिव्यांगों के लिए आरक्षित निधि, पेसा अंतर्गत कार्य, जनसहभाग से हुए विकास कार्य और बंधारे निर्माण की जानकारी ली गई। ग्राम पंचायत को सौर ऊर्जा आधारित बनाने और इस मॉडल को अन्य गांवों में लागू करने की सलाह भी दी गई। पानी आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उन्होंने जल आपूर्ति की नियमितता, क्लोरीन स्टॉक, पानी की गुणवत्ता जांच और पानीपट्टी वसूली पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल योजनाओं की स्थिरता के लिए पानीपट्टी की वसूली अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा क्षेत्र में छात्रों की अक्षर और अंक पहचान की जांच की गई तथा उन्हें छात्रवृत्ति परीक्षाओं के लिए प्रोत्साहित किया गया। उन्होंने बताया कि जिला परिषद के माध्यम से प्रत्येक गांव में खेल मैदान विकसित करने की पहल से युवाओं को खेलों के साथ पुलिस भर्ती जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिलेगी। इसके बाद टेकला ग्राम पंचायत का भी दौरा कर इसी प्रकार सभी योजनाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने ग्राम पंचायत स्तर पर नागरिकों को विभिन्न प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए तहसील कार्यालय के अनावश्यक चक्कर कम करने का आह्वान किया।

रिपोर्टर - संजय यमसलवार 

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