एक वोट की कीमत 10 लाख? गड़चिरोली में ‘घोड़ेबाज़ार’ तेज
गड़चिरोली : वर्धा–चंद्रपुर–गड़चिरोली स्थानीय स्वराज्य संस्था विधान परिषद चुनाव की घोषणा होते ही तीनों जिलों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बार का चुनाव आर्थिक ताकत, गुटबाजी और राजनीतिक समीकरणों के कारण खासा चर्चाओं में है। चुनावी प्रक्रिया शुरू होते ही “घोड़ेबाज़ार” और पैसों के खुले खेल की चर्चा ने पूरे विदर्भ के राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।
सूत्रों के अनुसार, दक्षिण गड़चिरोली में हाल ही में हुई एक गुप्त बैठक में पड़ोसी जिले के एक बड़े ठेकेदार विधायक द्वारा नगरसेवकों को पहले चरण में पांच-पांच लाख रुपये नकद देने का प्रयास किए जाने का सनसनीखेज दावा सामने आया है। एक नगरसेवक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर यह जानकारी दी। दावा किया जा रहा है कि चुनाव में समर्थन सुनिश्चित करने के लिए करोड़ों रुपये दांव पर लगाए जा रहे हैं।
स्थानीय स्वराज्य संस्था मतदारसंघ की इस चुनावी लड़ाई में करीब 977 मतदाता मतदान करेंगे। उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा से पहले ही राजनीतिक दलों की बजाय व्यक्तिगत संपर्क और आर्थिक लाभ देने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है। चर्चा यह भी है कि सत्ताधारी गुट विरोधी दलों के स्थानीय प्रतिनिधियों से संपर्क साधकर उन्हें 10 लाख रुपये तक का “ऑफर” दे रहा है।
इन चर्चाओं के बीच लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे जमीनी कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। स्थानीय नेताओं का आरोप है कि वर्षों से मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर बाहरी ठेकेदारों और धनबल वाले चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे पार्टी संगठन के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है।
दूसरी ओर, चंद्रपुर जिले की राजनीति में भी बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जानकारी के मुताबिक कांग्रेस के करीब 60 से 70 नगरसेवक अचानक अज्ञात स्थान पर चले गए हैं। इस खबर के बाद कांग्रेस खेमे में चिंता का माहौल है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन नगरसेवकों को “एडवांस रकम” देकर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है ताकि चुनाव के दौरान उनकी निष्ठा बनी रहे।
चुनाव की घोषणा के बाद जहां भाजपा के स्थानीय नेता पूरी तरह सक्रिय दिखाई दे रहे हैं, वहीं कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी खुलकर सामने आने लगी है। कुल 977 मतदाताओं में अकेले चंद्रपुर जिले के 444 मतदाता होने के कारण यह जिला चुनाव का सबसे अहम केंद्र बन गया है।
बताया जा रहा है कि चंद्रपुर जिले में कांग्रेस के लगभग 221 जबकि भाजपा के 136 नगरसेवक हैं। लेकिन कांग्रेस के कई नगरसेवकों के अचानक संपर्क से बाहर हो जाने के कारण पार्टी में टूट और क्रॉस वोटिंग की आशंका बढ़ गई है। अज्ञात स्थान पर गए नगरसेवकों में चिमूर, सिंदेवाही, नागभीड़, ब्रह्मपुरी, सावली और अन्य नगरपालिकाओं के सदस्य शामिल बताए जा रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से पहले मतदाताओं को अपने पाले में बनाए रखने के लिए बड़े स्तर पर राजनीतिक रणनीति और आर्थिक ताकत का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब मतदान से पहले अपने-अपने खेमों को एकजुट रखना सभी दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
रिपोर्टर : संजय यमसलवार

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