कम्मासूर गांव विकास से वंचित, ग्रामीणों ने पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष अजय कंकडालवार को सौंपा ज्ञापन

गडचिरोली : गडचिरोली जिले के अहेरी तहसील से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित कम्मासूर गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। आजादी के कई दशक बीत जाने के बावजूद गांव विकास की मुख्यधारा से दूर है। ग्रामीणों का कहना है कि कम्मासूर गांव आज भी दुनिया की तुलना में लगभग 50 वर्ष पीछे चल रहा है। गांव की विभिन्न समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष अजय कंकडालवार को ज्ञापन सौंपकर तत्काल समाधान की मांग की।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में आज तक पक्की सड़क, नाला और पुल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। बारिश के मौसम में रास्ते पूरी तरह कीचड़ से भर जाते हैं, जिससे गांव का संपर्क टूट जाता है। किसी ग्रामीण के बीमार होने पर उसे खाट या बैलगाड़ी के सहारे करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित देचलीपेठा उपकेंद्र तक ले जाना पड़ता है। कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीजों की रास्ते में ही मौत होने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गांव के पास स्थित नाले पर पुल नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में अहेरी और आलापल्ली तक पहुंचना जान जोखिम में डालने जैसा हो जाता है। पानी के तेज बहाव के बीच लोगों को आवागमन करना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार अब तक दो लोगों की बहकर मौत हो चुकी है। इसलिए नाले पर तत्काल पुल निर्माण कराने की मांग जोरदार तरीके से उठाई गई है।

इसके अलावा गांव में हर वर्ष गंभीर पेयजल संकट बना रहता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि बारिश शुरू होने से पहले गांव में नल जल योजना शुरू की जाए। कम्मासूर गांव में लगभग 90 प्रतिशत आदिवासी समाज निवास करता है, इसलिए सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए गोटूल भवन का निर्माण भी किया जाए, ऐसी मांग ज्ञापन में की गई है।

इस दौरान कृतीमंत पानेमवार, रघुपती आलाम, सुरेश बोडेंकी, रमेश येरमा, चुकाय्या चिंता, समय्या मडावी, श्रीनिवास बोडेंकी, संतोष मडावी, कृष्णा सडमेक, सुनील आलाम सहित बड़ी संख्या में कम्मासूर गांव के ग्रामीण उपस्थित थे।

रिपोर्टर : संजय यमसलवार 

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