आलापल्ली वन विभाग में वनरक्षकों की तबादला प्रक्रिया पर उठे सवाल
गडचिरोली : गडचिरोली जिले के आलापल्ली वन विभाग अंतर्गत वनरक्षकों की तबादला प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग में इन दिनों “मलाईदार बीट” हासिल करने के लिए लाखों रुपये के लेन-देन की चर्चाएं जोरों पर हैं। इस पूरे मामले से विभागीय कर्मचारियों में नाराजगी और असंतोष का माहौल बन गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2026 में आलापल्ली वन विभाग के अंतर्गत कुल 36 वनरक्षक तबादले के लिए पात्र हैं। आरोप है कि तबादला प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कुछ पसंदीदा कर्मचारियों को आर्थिक लेन-देन के आधार पर मलाईदार बीटों पर पदस्थापना दी गई। साथ ही कुछ वनपरिक्षेत्र अधिकारियों की मिलीभगत से मनमाने तरीके से तबादले किए जाने की चर्चाएं भी विभाग में चल रही हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि शासन के नियमों के अनुसार तबादला प्रक्रिया में पति-पत्नी एकत्रीकरण, सेवाज्येष्ठता तथा कर्मचारियों द्वारा दिए गए विकल्पों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। लेकिन कई मामलों में इन नियमों की अनदेखी किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इससे पूरी तबादला प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
वहीं, वर्ष 2025 में नियमित तबादला अवधि नहीं होने के बावजूद कुछ वनरक्षकों के मध्यावधि तबादले किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें एक मामला ऐसा भी बताया जा रहा है, जिसमें पहले से तबादला हो चुके एक वनरक्षक को दोबारा नियमों को दरकिनार कर मलाईदार बीट पर नियुक्ति दिए जाने की चर्चा विभाग में बनी हुई है।
इस पूरे प्रकरण के बाद वन विभाग के कार्यप्रणाली को लेकर संदेह व्यक्त किया जा रहा है। कर्मचारियों तथा नागरिकों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही तबादला प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी तरीके से लागू कर पात्र कर्मचारियों को न्याय देने की अपेक्षा भी जताई जा रही है।
रिपोर्टर : संजय यमसलवार

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