शिक्षक रविंद्र यमसलवार की पांच शैक्षणिक एवं संस्कारक्षम पुस्तकों का लोकार्पण, शिक्षाविदों ने की सराहना
गडचिरोली : गडचिरौली जिले के अहेरी तहसील अंतर्गत शिवनीपाठ के शिक्षक एवं संवेदनशील साहित्यकार रविंद्र रत्नाकर यमसलवार द्वारा लिखित पांच महत्वपूर्ण शैक्षणिक और संस्कारप्रधान पुस्तकों का हाल ही में भामरागढ़ एवं अहेरी में आयोजित अलग-अलग कार्यक्रमों में लोकार्पण किया गया। शिक्षा और संस्कारों के समन्वय पर आधारित इन पुस्तकों को शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा साहित्य प्रेमियों द्वारा विशेष सराहना मिल रही है।
दो चरणों में संपन्न हुआ पुस्तक लोकार्पण समारोह
रविंद्र यमसलवार की पुस्तकों का विमोचन दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के माध्यम से संपन्न हुआ।
भामरागढ़ स्थित लोक बिरादरी प्रकल्प में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ समाजसेवी एवं पद्मश्री सम्मानित डॉ. प्रकाश आमटे के हस्ते ‘भारतीय संस्कृति का वारसा’ तथा ‘शालेय परिपाठ’ पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।
वहीं अहेरी स्थित जिला सहकारी पतसंस्था सभागार में आयोजित समारोह में ‘संस्कारक्षम बोधकथा’, ‘मराठी बोधकथा’ और ‘मराठी व्याकरण’ पुस्तकों का विमोचन मान्यवरों की उपस्थिति में किया गया।
कई शिक्षाविदों और गणमान्य व्यक्तियों की रही उपस्थिति
अहेरी में आयोजित समारोह की अध्यक्षता राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत्त शिक्षक विनोद भोसले ने की। कार्यक्रम में पंचायत समिति अहेरी के गटशिक्षणाधिकारी सुनीलभाऊ आईंचवार, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डॉ. प्रवीण पुल्लूरवार, खुर्शीद शेख तथा सेवानिवृत्त शिक्षक बबलू सडमेक प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इसके अलावा राजूभाऊ आत्राम, लक्ष्मणभाऊ गद्देवार, राम पुलगमकर तथा समाजसेवी महेशभाऊ बेझंकीवार सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, साहित्यप्रेमी और नागरिक समारोह में मौजूद रहे।
विद्यार्थियों में संस्कार और जीवनमूल्य विकसित करने का प्रयास
अपने संबोधन में लेखक रविंद्र यमसलवार ने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, नैतिक मूल्य और जीवन कौशल का विकास भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनकी पांचों पुस्तकें विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होंगी तथा शिक्षकों के लिए भी मार्गदर्शक सामग्री का कार्य करेंगी।
मान्यवरों ने की सराहना, उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की दी शुभकामनाएं
कार्यक्रम में उपस्थित सभी मान्यवरों ने रविंद्र यमसलवार के शैक्षणिक एवं साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी पुस्तकें विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और समाज में सकारात्मक मूल्यों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने लेखक को उनके आगामी साहित्यिक कार्यों के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन प्रमोद रोहनकर ने किया, जबकि यमाजी मुंजमकर ने उपस्थित सभी अतिथियों एवं नागरिकों का आभार व्यक्त किया।
रिपोर्टर : संजय यमसलवार
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